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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 536

( ४९० ) बीजक कबीरदास ।
लक्षण नहीं मिलत एकौके लक्षण जो मिलते तौ कुमारि न रहती बिबाहि
जाती याहीते अब तक कुमारि है ॥ १ ॥ जब समुद्र मथिगयो लक्ष्मीकढ़ी सो
सबदेवमिलि हरिको देतभये सो हरि चारिहुयुग सङ्गही राखतभये ॥ २ ॥
यह प्रथमहि पद्मिनिरूपआयाहै सांपिनिसब जग खेदि खाय
याबर युवती बे वार नाह । अति तेज तिया है रैनि ताह ॥४॥
प्रथमतो ब्रह्मजे हैं विष्णु तिनकी नाभिमें कमलिनीहै सो लक्ष्मी रूपहै सो
आय अब धन रूप सांपिनि है संसारको खेदिखाय है ॥ ३ ॥ या माया बरयुवती
है कहै श्रेष्ठ है बार जे लरिका ब्रह्मा विष्णु महेश तेई याके नाह हैं औ ताह
कहै तौन जो संसार रूपी रैनि है तौने में अति तेजहै ॥ ४ ॥
कह कबीर सब जगपियारियह अपने बलकवै रहल मारि ५
. सो श्रीकबीरजी कहैं हैं कि या माया सबजगतको पियारिहै आपन बाल-
क जे जीव तिनको मारि रही है अर्थात् सब जीवनको बांधे है जनन मरण
करावै है ॥ ५ ॥
इति पांचवां बसंत समाप्त ।
अथ छठवां बसंत ॥ ६ ॥
माई मोर मनुष है अति सुजान। धंधा कुटि कुटि करै बिहान १
बड़े भोर उठि अँगन वहार । बड़ी खांच लै गोबर डार ॥२॥
बासी भात मनुष ल खाय । बड़ घैला लै पानी जाय ॥३॥
अपने सैंयां बांधी पाट । लैरे बेंचौ हाटै हाट ॥ ४ ॥
कह कबीर ये हरिकेकाज । जोइयाके ढिंगर कौन है लाज ५
जीव शक्ति कहै है कि, हे माई माया ! मोर मनुष जो मन सो बड़ा
सुजान है ! धंधा जो बाल पौगंड किशोर ताहीको कूटिकूटि कहै कैकै बिहान-
कहै देहांत कै देइहै । सुजान याते कह्यो कि, मोको नहीं जान देइहै । आपही