कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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पृष्ठ 525, कुल 766 में से
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कियो साहबको ज्ञान हमारे नहीं भयो सो साहब या लोकके
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- "परिबेही": प + र + ि + ब + े + ह + ी
- "कियो": कियो
- "साहबको": साहबको
- "ज्ञान": ज्ञान
- "हमारे": हमारे
- "नहीं": न + ह + ी + ं
- "भयो": भयो
- "सो": सो
- "साहब": साहब
- "या": या
- "लोकके": लोकके
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मालिक जेहैं तेईहैं जिनके जाने संसार छूटैहै ब्रह्मसाहब नहीं है ॥ २ ॥
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- "मालिक": मालिक
- "जेहैं": जेहैं
- "तेईहैं": त + े + ई + ह + ै + ं
- "जिनके": जिनके
- "जाने": जाने
- "संसार": संसार
- "छूटैहै": छ + ू + ट + ै + ह + ै
- "ब्रह्मसाहब": ब्रह्मसाहब
- "नहीं": नहीं
- "है": है
- "॥ २ ॥": ॥ २ ॥
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Line 16:
सो पिता जो हमारो धोखा ब्रह्म जौनेके द्वारा हम व्यष्टिभये सो जब
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- "सो": सो
- "पिता":