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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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सत्यनाम
बीजक कबीरदास ।
अथ आदिमंगल ।
दोहा—प्रथमै समरथ आप रहे, दूजा रहा न कोइ ॥
दूजा केहि बिधि उपजा, पूछत हौं गुरु सोइ ॥ १ ॥
तवसतगुरु मुखबोलिया, सुकृतसुनोसुजान ॥
आदि अन्त की पारचै, तोसों कहौं बखान ॥ २ ॥
प्रथमसुरति समरथ कियो, घटमें सहजउचार ॥
ताते जामन दीनिया , सात करी विस्तार ॥ ३ ॥
दूजे घट इच्छा भई, चितमनसातो कीन्ह ॥
सातरूप निरमाइया, अविगत काहु न चीन्ह ॥ ४ ॥
तवसमरथ के श्रवणते, मूलसुरति भै सार ॥
शब्द कला तातेभई, पाँच ब्रह्म अनुहार ॥ ५ ॥
पाँचौ पाँचै अंड धरि, एक एकमा कीन्ह ॥
दुइ इच्छा तहँ गुप्तहैं, सो सुकृत चितचीन्ह ॥ ६ ॥