कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 519, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहरा । ( ४७३ )
अथ आठवां कहरा ॥ ८ ॥
क्षेम कुशल औ सही सलामत कहहु कौनको दीन्हा हो ।
आवत जात दुनौ विधि लूटे सरब संग हरि लीन्हा हो॥१॥
सुर नर मुनि जेते पीर औलिया मीरा पैदा कीन्हाहो ।
कहँलौं गिनैं अनंत कोटिलै सकल पयाना दीन्हाहो ॥२॥
पानी पवन अकाश जाहिगो चन्द्र जाहिगो सूराहो ।
वहभी जाहिगो यहभी जाहिगो परत काहुको न पूराहो॥३॥
कुशलै कहत कहत जग विनशै कुशल कालकी फांसीहो ।
कह कबीर सब दुनियांविनशल रहलरामअविनाशीहो॥४॥
क्षेम कुशल औ सही सलामत कहहु कौन को दीन्हा हो ।
आवत जात दुनौ बिधि लूटे सरब संग हरि लीन्हा हो॥१॥
श्री कबीरजी कहै हैं क्षेम कहे कल्याण स्वरूप सदा रहै औ कुशल कहे
सब बातमें कुशल होय अर्थात् सर्वज्ञ होय औ सही सलामत कहे जेहिके सहीतें
जीव सलामत ह्वै जाय अर्थात् जेहिके अपनाय लीन्हेते जीवको जनन मरण
छूटि जाय ऐसे जे अपने गुणहैं ते साहब कौने जीवको अपने बिना जाने दीन्ह
है अर्थात् काहूको नहीं दीन ऐसे जे साहब हैं सरब संग कहे सब के अंत-
र्यामी तिनको या काल जीवको आवत कहे जनन औ जात कहे मरन दूनौ
बिधिमें लूट्यो अर्थात् जब आयो तब गर्भको ज्ञान नाशकै दियो औ जब
जाइगो तब वही को नाश ह्वैगयो साहबते चिन्हारी ना करनदियो ॥ १ ॥
सुर नर मुनि जेते पीर औलिया मीरा पैदा कीन्हाहो ।
कहँलौं गिनैं अनंत कोटिलै सकल पयाना दीन्हाहो॥२॥