कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४७० ) | बीजक कबीरदास ।
त्रांत्रिक ३ चार्वाक ४ सो सौगतनामके आत्मा क्षणिक नाशमानमानै हैं जैसे
घट, सो आस्तिक मतते विरुद्धहै काहेते कि आस्तिक आत्माको नित्य मानै है ॥ १॥
विज्ञानवादी पदार्थ मात्रका ज्ञान स्वरूप मानै है सो आस्तिक मतमें बाधक है
काहेते कि जो क्षणिक ज्ञानके बाहर दूसर पदार्थ नहीं मानै है तौ ज्ञानाश्रय
आत्मा केहितराते होइ ॥ २ ॥ औ सौत्रांत्रिक गुणरूप आत्मा मानै है कौन
गुण सुख बिशेषगुण सो आस्तिक मतते बिरुद्ध है काहेते आस्तिक सुखरूप
सुखाश्रय आत्माको मानै है ॥ ३ ॥ औ चार्वाक शरीरैको आत्मा मानै हैं
काहेते प्रत्यक्षहै सो आस्तिक मतते बिरुद्धहै काहेते शरीरते अभिन्न आत्माको
मानै है याही रीति उदयनाचार्य बौद्धाधिकार ग्रन्थमें बहुत नास्तिकनकॊ खंडन
कियो है ॥ ४ ॥ औ अछू हमहूं कहै हैं औ सौगत जो आत्माको क्षणिक
नाशवान् मानेंगे औ चार्वाक जो शरीरको आत्मा मानेंगे तो जो क्षणिक नाश
मान् आत्मा होत तौ भूत कैसे होत याते सौगत निराकरण भयो औ जो शरीरै
आत्मा होयगो तौ मुर्दा कैसे होइगो शरीर काटिहू डारे चैतन्य रहैगो औ
विज्ञानबादी जो आत्माको ज्ञानस्वरूप मानिगो तौ अज्ञान कैसे होयगो औ
सौत्रांत्रिक सुख गुणस्वरूप आत्मा मानै है तौ गुणतो बिना गुणी रहतई नहीं
है सो गुणी कोहै जो कहो अर्हन्को अथवा जिनको गुण मानै है जीवात्माको
तौ गुण गुणी को समवाय है गुण गुणी को छोड़िकै नहीं रहै है
सो जीव जो अज्ञानी भयो सो जाको गुणहै जीव सोऊ अज्ञान भयो जो
चार्वाक कालैकै प्रत्यक्ष मानैहै गुण गुणी को नहीं मानि है वेद शास्त्रको
कहो मिथ्या मानौहौ सो ग्रहण शास्त्रमें लिखै है सो परतही है सो वेदको कहो
कैसे मिथ्या मानै तुम्हारे शास्त्र में लिखै है कि पृथ्वि नीचेको चली जाइहै सो
जौ पृथ्वी चली जाती तौ पाथर फेंकेते फेरि कैसे पृथ्वीमें मिलतो काहेसे कि
पाथर हलुकहै बिलम्ब पूर्वक आवाचाही पृथ्वि गरूहै जल्दी जावा चाही ताते
तुम्हारे ग्रन्थ झूठे हैं वेद शास्त्र सांचे हैं सो श्री रामचन्द्र बिना तुम मिथ्या
जन्म गमाइ दिह्यो ॥ ४ ॥
इति छठवां कहरा समाप्त !