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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 510, कुल 766 में से

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पृष्ठ 510

( ४६४ ) बीजक कबीरदास ।

सरस मन जासू। साधुसभा बड़ आदर तासू ॥ सिद्ध विरक्त महामुनि
योगी । नाम प्रसाद ब्रह्म सुखभोगी" ॥ या ते यह कि राम बिना मुक्तहुनकी
गति नहीं है अरु भाई जो कह्यो सो जीवके नाते कहैं हैं कि हम सब यकीहैं
अरु इहां एकबचन कहैहैं सो प्रति जीव सो पृथक् २ कहै हैं कि हे भैया या
दुःखमार्ग त्यागि देउ यामें दुःख पावोगे ताते राम कहते चलो ॥ नाहिंतो
भव बेगारिमें परिहौ पुनि छूटब अति कठिनाईरे ॥ नहीं तो भव जो संसार
है ताके बेगारिमें परोगे बेगारि परिबो कहाहै जाते संसारते कबहूं न उद्धार
होइ ऐसे कर्म माया तुमको धरिकै करावैगी जो शरीररूप डोलाको गुमान
कियेहोहु कि डोला चढ़ि बेगारि न परेंगे तो धरनवारो समरथ है डोलामें
चढ़ेहू धरि लैगो तब कठिन ह्वै जायगो जैसे फिरङ्गी म्याना पालकिनवाले
को बेगारि पकरै है तब कोई कहै हैं किं येतो बड़े आदमी हैं इनको सड़क
खोदना चाहिये तब अंग्रेजलोग कहैहैं कि हमारे इहां दस्तूरहै म्याना चढ़े जाइ
वहीं में फरुहा कुदारी धरे जाइ सो पालकिउ चढ़े बेगारि धरि जाइ है औ डोलहू
तिहारो जर्जरहै सो कहैं हैं ॥ "बांस पुरान साजु सब अटखट सरल तिकोन खटो-
लारे। हमहिं दिहलकारि कुटिल करमचंद मंद मोल बिन डोलारे ॥ प्रारब्ध जो है
सोई पुरान बाँस है काहे ते कि संचित तो प्रारब्ध भै है तेहिते महापुरानहै।
औ सब साज अटखट कह्यो सो आठ औ षट कहै चौदह साज हैं शरीररूपी
डोलाकी सो कहैहैं "त्वचा, रुधिर, मांस, अस्थिं, मेद, मज्जा, शुक्र, केश, रोम,
नस, नख, दंत, मल, मूत्र, सो त्वचा डोलाको वोहारहै रुधिर वोहार को रंग औ
मांस वोहारकी तुई है औ अस्थिडोलाको काठहै औ मेद मज्जा डोलाको तकिया
बिछौनाहै औ नस रसरीहै औ नख लोहेकी पतुरी है औ दांत खीला है औ
मलमूत्र लघुत है औ घुनको कीरा है काहेते कि कीरनहू में पानी होय है।
अथवा साजु सब अटखट जो यह पाठ होइ तौ पुरजा पुरजा जो रै है यही
अर्थ है औ सरल जो कह्यो सो सरौहै कहे रोगनते ग्रसितहै औ तिकोन खटो-
ला जो कह्यो डोलामें सो शरीर की तीन अवस्था हैं जाग्रत् स्वप्न सुषुप्ति याहीमें
परोरहै है सोई तिकोन खटोला है अथवा बालपन युवापन वृद्धापन ई तीनों-
पन तिकोन खटोलाहैं शरीर रूपी डोलामें सो ऐसो डोला कुटिल करमचंद