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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 508

( ४६२ ) बीजक कबीरदास ।
अथ पांचवां कहरा ॥ ५ ॥
राम नाम भजु राम नाम भजु चेति देखु मन माहींहो ।
लक्ष करोरि जोरि धन गाड़े चले डोलावत बाहींहो ॥ १ ॥
दाऊ दादा औ परपाजा उइ गाड़े भुइ भांडेहो ।
अँधरे भये हियाकी फूटी तिन काहे सब छांड़ेहो ॥ २ ॥
ई संसार असार को धन्धा अंतकाल कोइ नाहींहो ।
उपजत बिनशत वार न लागै ज्यों बादरकी छाहींहो ॥ ३ ॥
नाता गोता कुल कुटुम्ब सब तिनकी कवनि बड़ाईहो ।
कह कबीर एक राम भजे बिन बूड़ी सब चतुराईहो ॥ ४ ॥
राम नाम भजु राम नाम भजु चेति देखु मन माहींहो ।
लक्ष करोरि जोरि धन गाड़े चले डोलावत बाहींहो ॥ १ ॥
श्री कबीरजी कहै हैं कि हे मूढ़ ! परमपुरुष श्री रामचन्द्रको रामनाम है
ताको भजु भजु। भज सेवायां धातुहै सो याही रामनामको सेवा करु । रामनाम
मन बचनके परै है सो आगे लिखि आये हैं आपने मनमें चेति कहै बिचारिकै
देखु तो लाखन करोरिन धन जोरिकै गाड़ी २ धरयो जब मरन लाग्यो यमदूत
लै जान लगे तब बाहीं डोलावत चलौहो कि वे धन हमारे नहीं हैं ॥ १ ॥
दाऊ दादा औ परपाजा उइ गाड़े भुइँ भांडेहो ।
अँधरे भये हियोकी फूटी तिनकाहे सब छांड़ेहो ॥ २ ॥
जो कहो वा जन्म कब देख्योह तो तेरे दाऊ दादा औ परपाजा वे भुइँ
में केतौ भांड़े गाड़ी गाड़ी मरिगये हैं उन्हीं के साथ कबै धन गयो है सो तैं
आँधरे ह्वैगये तेरे हियोकी फूटि गई हैं जैसे सब धन छोड़िकै वे चले गये हैं
धनको मालिक तुहीं भयो ऐसे तुहूं धन छोड़िकै चलो जायगो तेरों धन औरही
कों होयगो तेरे हाथ कछु न लगैगो ॥ २ ॥