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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 505

कहरा । ( ४५९ )
किये सो कहरा कहे कहर करनवारो है सो तैं आपनो रूपतौ विचारु कहाँ
माया दास ह्वैरहै है तैं महरा कहे मायाके हरनवारे जे हैं साधु तेही माहिं समाना
कहै तैं तिनके बरोबर है जो तैं आपने स्व स्वरूपको जानै है ॥ ८ ॥
इति दूसरा कहरा समाप्त ।
अथ तीसरा कहरा ॥ ३ ॥
रामनामको सेवहु वीरा दूरि नहीं दुरि आशाहो ।
और देव का पूजहु बौरे ई सब झूठी आशाहो ॥ १ ॥
उपरके उजरे कहभो बौरे भीतर अजहूं कारोहो ।
तनको बृद्ध कहा भो बौरे ई मन अजहूं बारोहो ॥ २ ॥
मुखके दांत गये का बौरे अंदर दांत लोहेके हो ।
फिरि फिरि चना चवाउ विषयके काम क्रोध मद लोभेहो ३
तनकी शक्ति सकल घटि गयऊ मनहिं दिलासा दूनीहो ।
कहै कबीर सुनो हो संतो सकल सयानप ऊनीहो ॥ ४ ॥
राम नामको सेवहु वीरा दूरि नहीं दुरि आशाहो ।
और देव का पूजहु बौरे ई सब झूठी आशाहो ॥ १ ॥
श्री कबीरजी कहै हैं कि हे कायाके वीरौ जीवो ! रामनाम को सेवन करो
राम नाम दूरि नहीं है तुम्हारी आशा दूरिहै और देवको हे बौरे का पूजहुहौ
इनकी आशा सब झूठी है ॥ १ ॥
ऊपरके उजरे कह भो बौरे भीतर अजहूं कारोहो ।
तनको वृद्ध कहाभो बौरे या मन अजहूं वारोहो ॥ २ ॥
मुखके दांत गयेका बौरे अंदर दांत लोहेके हो ।
फिरि फिरि चना चवाउ विपयके काम क्रोध मद लोभेहो ३