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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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भूमिका ।
इस ग्रन्थके प्रथम कबीरकसौटी, सत्यकबीरकी साखी और कबीर उपासना
पद्धति नामक पुस्तकें छप चुकी हैं, । सत्य कबीरकी साखीकी भूमिकाकी
मतिज्ञानुसार बीजककी टीकाओंको छापना आरंभ किया है ।
बीजककी कईटीकाओंमें यह टीका परम प्रसिद्ध और वैष्णवमात्रकों
मान्य है । मान्य क्यों नहो जबकि साकेतविहारी भगवान् रामचन्द्रजीके
अनन्य उपासक, वेद, शास्त्रके पूर्ण ज्ञाता, सांगीत आदि विद्या कुशल श्रीमन्म-
हाराजाधिराज बाँधवेश, रीवाँधिपति साकेतनिवासी श्रीमहाराज विश्वनाथ
सिंहजूदेव बहादुरने स्वयम् इसकी टीका की है । इस परभी सोनामें सुगन्ध
यह है कि, यह टीका भी स्वयम् कबीर साहबकी आज्ञासे हुई है और श्री
कबीर साहबने इसे पसन्द भी कियाहै जिसका विस्तृत विवरण इस पुस्तकके
आदि मंगलकी टीकामें मिलेगा ।
जब कि समयके फेरसे भारत वर्षसे वीरता, लक्ष्मी और विद्या ती-
नोंने भारतपर कोप कर सात समुद्र पार जा बसनेकी प्रतिज्ञाली है तब भी
पवित्र बघेलवंशीय बाँधवेश,, रीवाँधिपतिके वंशमें धर्मके संपूर्ण स्वरूपसें
विराजनेके कारण तीनोंही एक स्थानमें पाये जाते हैं ।
जिसका कुछ वर्णन इसी पुस्तककें अन्तमें छपे हुए बघेल बंशागमनिर्दें-
श नामक पुस्तकके बाँचनेसे ज्ञात होगा ।
उसी पवित्र वंशके वर्तमान नृप श्रीमान् गोब्राह्मण प्रतिपालक, बघेल
कुल तिलक, अवनीश, बान्धवेश, रीवाँनरेश, प्रजाप्रिय, सिद्धि श्री मन्महाराज
धिराज श्री १०८ श्रीमहाराज श्रीसीताराम कृपा पात्राधिकारी सर वेङ्कटरमण
रामानुजप्रसाद सिंह जू देव बहादुर जी. सी. एस. आई-की आज्ञानुसार यह
पुस्तक छापी गयी है । इतनीही नहीं आपने अपने पूर्वजोंकी बनायी. हुई सर्व