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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 490

( ४४२ ) बीजक कबीरदास ।
पापपुण्यकै हाथेहिपासा । मारि जगतको कीन्हबिनासा १७
येवहनी दोऊ वहनि न छाड़ै। यहगृहजारैं वहगृह माड़ै ॥१८॥
बैठेते घर शाहु कहावै । भितरभेदमैनमुसाहि लगावै ॥१९॥
ऐसीविधि सुरविप्र भनीजै।नामलेत पंचासन दीजै ॥२०॥
ऊंचनीचकहुकाहिजोहारा।बूड़िगयेनहिंआपुसँभारा॥२१॥
ऊंचनीचहै मध्यमबानी । एकैपवन एकहै पानी ॥ २२ ॥
एकैमटियाएककुम्हारा । एकसवनकासिरजनहारा ॥२३॥
एकचाक बहुचित्र बनाया।नादविंदुके बीच समाया ॥२४॥
ब्यापीएकसकलकी ज्योती ।नामधरे क्याकहिये मोती२५
राक्षसकरणी देवकहावै । वादकरै भवपार न पावै ॥ २६ ॥
हंस देह तजि न्यारा होई ॥ ताकी जाति कहै धौं कोई॥२७॥
श्यामसुपेतकि, राता पियरा।अवरणवरणकितातासियरा२८
हिंदू तुरुक कि बूढ़ा बारा।नारि पुरुष मिलि करौ विचारा२९
कहिये काहि कहा नहिं माना।दास कबीर सोई पहिचाना ३०
साखी—वहा अहै बहिजातुहै, करगहि ऐंचहु ठौर ।
समुझाये समुझै नहीं, दे धक्कादुइ और ॥ ३१ ॥
सुनहु सबनमिलिबिप्र मतीसी।हरि बिन वूड़ी नाव भरीसी १
ब्राह्मण हैकै ब्रह्म न जानैं । घरमें यज्ञ प्रतिग्रह आनैं॥ २ ॥
जे सिरजातेहि नहिंपहिचानैं।करमभरम लैबैठि बखानैं॥३॥
ग्रहण अमावस सायर पूजा।स्वातीके पात परहु जनि दूजा ४
विप्रके वर्णनमें हम तीस चौपाई कहै हैं सो सबन मिलि सुनते जाउ कैसे
ब्राह्मण हीतभये कि, जिनको जन्म हरिबिना भरी नाव ऐसी बूड़िगई ॥ १ ॥