कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशकहिये सुखको शाकहिये शेषको सो हे जीव! तैंतो सुखसागरजे साहबहैं तिनकों
शेषहै अर्थात् अंशहै सो सुखसर जे साहब हैं तिनको तुमकोई नहीं देखौहै
कैसो है वा सर कि जाकी शीतलता एकई है वा शीतलता पाये फिरि जनन
मरणनहीं होइहै सो शशा जे साहबके शेषसाधुहैं तेकहैं हैं कि जिनको अंशजीव
तिनको नहींजानै है शून्यजो धोखाब्रह्म ताहीमें जगत समानजाइहै। श शेषको औ
सुखको कहै हैं ॥ “वदन्ति शं बुधाः शेषे शः शांतश्च निगद्यते॥ शश्च शयन-
मित्याहुः हिंसा शः समुदाहृतः ॥ ३१ ॥
षषा षरषर कहै सब कोई । षर षर कहे काज नहिं होई ॥
षषा कहै सुनौरे भाई । राम नाम लै जाहु पराई ॥ ३२ ॥
ष कहिये श्रेष्ठको । सो ष दूसरी है सो हे जीव ! श्रेष्ठौते श्रेष्ठजे साहबहैं
तिनको षरषर सांचसांच सबै कहै हैं औरेको खोटामानै हैं परंतु षर षर कहेतें
काज जो है मुक्ति सो न होगी बिना रामनामके साधनकीन्हे । औ विना
नीकी प्रकार साहबके जाने। काहेते षषा कहे श्रेष्ठौते श्रेष्ठ जे साहब हैं ते कहैं हैं
कि, हे भाई ! सुनौ ! तुम राम नामको लैकै मायाब्रह्म ते पराइ जाउ अर्थात्
सब को छोड़िकै रामनाम जपौ । ष श्रेष्ठको कहै हैं॥ “षकारःकीर्तितः श्रेष्ठेष्व्-
इच्छगर्भविमोचने” ॥ ३२ ॥
ससा सरा रचो बरिआई । सर वेधे सब लोग तवाई ॥
ससाके घर सुन गुन होई। यतनी बात न जानै कोई ३३॥
स कहिये लक्ष्मी को सा कहिये परोक्षको । सो हे जीव ! तेरो ऐश्वर्य्य
परोक्षमें है अर्थात् साहबके यहां है या देखबेकी लक्ष्मी तेरी नहीं है सो तैं सरा-
जोकर्म है ताको बरिआई रचिलियो सो वाही सरारूपीशरहै कहे कर्मरूपीशरमें
लोग बेधे हैं ते सब तवाईमें परे हैं नरक स्वर्गमें जाय आवै हैं। सो ससा जो जीव
ताके घर कहे हृदयमें काहूको शून्यकहे धोखा ब्रह्म समान है, काहूके गुण जो
१-'श' शं- सुख, मङ्गल, श- शेषनाग, शान्त प्रकृति, सोना और हिंसाकरने
को कहतेहैं ।
२-'ष' श्रेष्ठको और 'षृ' गर्भसे प्राणीकी उत्पत्ति होनेको कहतेहैं ।