कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 480, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंसो दरि बसै है सोरे निष्फल ज्ञानवारे मूढ़ जीव! टूटै तेर नाउं कहे वा धोखा
ब्रह्ममें जगै तेरोजीवत्व को नाउं टूटि जाइगो अर्थात् तैंहूं धोखा ब्रह्म कहावन
लगैगा । सों या ज्ञान में केतौ मरिगये हैं औघना कहे बहुत जीव मुये जांहि
हैं। औ केतेजनै यही रीति मरिहैं या धोखाब्रह्म निष्फलज्ञानते साहब न
मिलेंगे। ण निष्फलको औ ज्ञानको कहै हैं तामें प्रमाण ॥ “ णकारः कीर्त्तितो ज्ञाने
निष्फलेऽपि प्रकीर्त्तितः ” ॥ १६ ॥
तता अति त्रियो नहिं जाई । तन त्रिभुवनमें राखु छपाई ॥
जो तन त्रिभुवन माहं छपावै। तत्त्वहि मिले तत्त्व सो पावै १७
त कहिये चोरको ता कहिये सीगटकी पूंछको सो हे जीव! साहबते चोराइकै
आंखी छपाइकैकै सिंहजो साहब ताकीशरण छोड़िकै सीगटकी पूंछजो धोखाब्रह्म
तौनेको तैं गहे सो अतित्रियोकहे आसमता ताते कहे अत्यंत चारिउ ओर व्याप्ति
[L12