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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 479

चौंतीसी। (४३१)
डडा डर कीन्हें डर होई। डरहीमें डर राखु समोई ॥
जो डर डरै डरै फिरिआवै। डरहीमें पुनि डरहि समावै॥१४॥
एक ड कहिये ध्वनिको औ डा कहिये त्रासको सों मायारूप बाणीकी त्रास
कहे डर सो याडर तेरेकीन्हे ते होईहै अर्थात् ये मिथ्या हैं तैंहीं बनायलियो
है समोइदे। कैसेमिटै सो जिनको तैं डरै है। बिषयन को तिनको इन्द्रिनमें
समोइदे,इंद्रिनको डरै है सोमनजो महाडरहै तामें समोइदे,औ मनको चित्तन्मा-
त्रब्रह्म में समोइदे या रीतिते डरको डरमें समोइकै तैं फिरिआउ साधनकरि
साहबको जानु। डकार ध्वनिको औ त्रासको कहै हैं तामें प्रमाण ॥ “डकारः
शंकरे त्रासे डकारो ध्वनिरुच्यते ” ॥ १४ ॥
ढढा ढूढ़त ई कत जाना। ढीगर डोलहि जाइ लोभाना ॥
जहां नहीं तहँसब कछु जानी। तहां नहीं जहँ ले पहिंचानी १५
ढ कहिये बाणीको ढा कहिये निर्गुण ब्रह्म को। सो हे जीव ! बाणीमें लगिकै
निर्गुण ब्रह्मको ढूँढ़त तोको कहां जानाहै अर्थात् उहाँ कछुनहीं है तैंतो साहबकों
है वा ढीगर जापुरुषके है तौनेको ढोल बाजा बानीरूप पानी तौनेमें लोभाने
तैंनाइ अर्थात् या बाणीरूप ढोलवाजा है अहंब्रह्म बुद्धि बतावै है सो दूरिकों
ढोल सुहावन है वामें कछुनहीं। देशकालबस्तु परिच्छेदते शून्य है हाथ एकौ
न लगैगो। सो हे जीव ! जहांकेहै जौने साधनमें साहबनहीं हैं तौनेन साधन को तैं
सबकछु जानिलीन्हे है। सो जहां नहीं कहे जहां माया ब्रह्म ये एक हू नहीं हैं
तहा साहबको तैं पहिचानले। ढ निर्गुणको औ ध्वनि को कहै हैं तामें प्रमाण ॥
“ ढकारःकीर्त्तितो ढक्का निर्गुणेच ध्वनावपि ” ॥ १५ ॥
णणा दूरि बसौ रे गाऊं। रे णणा टूटै तेरे नाऊं ॥
मुये येते जिय जाही घना। मुये यतादिक केतिक बना १६
ण कहिये निष्फलको णा कहिये ज्ञानको। सो हे जीव ! या धोखा ब्रह्मकों
ज्ञान तेरो निष्फल है या ज्ञानते साहब न मिलेंगे साहब को गाउंजो साकेत हैं
१-‘ड’ श्री महादेव भय और शब्द में कहागयाहै।
२-‘ढ’ ढक्का गुणरहित और शब्दको कहतेहैं।