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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 48

रमैनी । ( ४५ )
पहिरें चीर॥युग युग नाचे दास १३५कबीर ॥ २१ ॥ रमैनी ॥भासे
जीवरूप सो एक ॥ तेही भास के रूप अनेक ॥ कोई १३६मैंगन
रूप लौलीन ॥ कोई १३७अँरूप ईश्वर मन दीन ॥ कोई कहै कर्म-
१३८रूप है सोय ॥ शब्द १३९निरूपेन करे पुनि कोय ॥ १४०संशय रूप
कोई भगवान ॥ कर्त्ता न्यारा १४१कोई अनुमान ॥ कोई कहै
१४२ईश्वरै ज्योतिहिं जान ॥ आतम को कोई १४३स्वतः बखान ॥
कोई कहै सब १४४पुनि सबते न्यारा ॥ आपै राम विश्व विस्ता-
रा ॥ शब्द १४५भौंव कोई अनुमान ॥ अद्वै रूप १४६भई पहिचान ॥
१४७डेंगडुग रही को बोलै बात ॥ बोलतही सब तत्व नशात ॥
बोल १४८अंबोल लखे पुनि कोय ॥ भास जीव नहिं परखै सोय
॥ साक्षी ॥ निज अँध्यास झांई अहै, सोसंधिक औभास ॥
प्रथम अनुहारी कल्पना, सदा करे परकास ॥ २६ ॥ रमैनी॥
लख चौराशी योनि जेते ॥ देही बुद्धि जानिये तेते ॥ जहं
जेहि भास सोई सोइ रूप ॥ निश्चै किया परा भवकूपं ॥ नाना
भांति विषय रस लीन ॥ अरुझि २ जिव मिथ्या दीन ॥
१५०दाँवा १५१विषयै जरै सब लोय ॥ बांचा चहै गहै पुनि सोय ॥दृढ़
विश्वास १५२भरोसा राम ॥ कबहूं तो वे आवैं काम ॥ १५३विषयै
विकार मांझ संग्राम ॥ राम खटोला किया अराम ॥ घायल
बिना तीर तरवार ॥ सोइ १५४अभरैंण जेहि रीझे भरतार ॥
१३५ भक्त लोग ॥ १३६ सगुण उपासक ॥ १३७ निर्गुण उपासक ॥
१३८ पूर्व मीमांसक ॥ १३९व्याकरणी ॥ १४० वैशेषिक ॥ ( काल वादी )
१४१ तर्क वादी नैयाइक ॥ १४२ योगी ( पातांजल ) १४३ सांख्यक ॥
१४४ वेदांती ॥ १४५ बोलता ॥ १४६अद्भुत रूप ॥ १४७ शंका ॥
१४८ विज्ञानी ॥ १४९ कल्पना ॥ १५० उसके बुद्धि का जो विषय ॥
१५१ अग्नि ॥ १५२ आशा ॥ १५३॥ क्षोभ, ऐब ॥ १५४ गहना ॥