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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

साक्षी ॥ धन्य धन्य तरण तरण, जिन परखा संसार ॥
बंदी छोरकबीरसों, परगटगुरू विचार ॥ २४ ॥ रमैनी ॥
शब्द संधि ले ज्ञानी मूढ ॥ देह करमजगत आरूढ़ ॥ नौंइंसं-^१२५
धिलै सपना होय ॥ झांईं शून्य सुषोपति सोय ॥ ज्ञान प्रका-
शक साक्षी संधि ॥ तुरियातीत अभास अबंधि ॥ झांईं ले
बरते वर्तमान ॥ सो जो तहां परे पहिचान ॥ काल अस्थिति
के भासनशाए ॥ परख प्रकाश लक्ष बिलगाए ॥ बिलगेलक्ष
अपन ^१२६पौ जान ॥ आपु अपन पौ भेद न आन ॥ साक्षी
॥ आप अपन पौ भेद बिनु, उलटिपलटि अरझाय ॥ गुरु बि-
न मिटे न दुगदुगी, अनबनीयतभनशाय ॥ २५ ॥ रमैनी ॥
निज प्रकाश झांई जो जान ॥ महा संधि माकाश बखान ॥
सो ईं^१२७पांजी ल बुद्धि विशेष॥प्रकाशक तुरियातीत अरुशेष॥
विविध भावना बुधि अं^१२८नुरूप ॥ विद्यामाया सोई स्वरूप ॥
सो संकल्प