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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 474, कुल 766 में से

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पृष्ठ 474

( ४२६ ) बीजक कबीरदास ।
जौन खसम जे साहब हैं तिनको छोड़िकै जो दशौ दिशामें धावै है कहै
नाना उपासना करै है सो या चूकबकसाबै । औ ख जो चैतन्याकाश सम कहै
सर्वत्र पूर्ण ऐसो जो धोखा ब्रह्म ताको छोड़िकै तैं क्षमा ह्वैरहु ब्रह्मको बाद विवाद
न करु होइ अखीन कहे आपनो स्वरूप जानिकै कि मैं साहबको हौं अक्षय हौं
ब्रह्महूमें लीन भये मेरो जीवत्व नहीं जायहै ऐसो हंस रूप ह्वैकै अक्षय पद जे
साहब तिनको गहु ख कहे आकाशतामें प्रमाण ॥ “खमिन्द्रिये खमाकाशेखः
स्वर्गऽपिमकीर्तितः” ॥ ३ ॥
गगा गुरुके बचनै मानै । दूसर शब्द करै नहिं कानै ।
तहां विहङ्गम कतहुं न जाई।औगहि गहिकै गगन रहाई॥४॥
ग जो है साहबको गीत ताको गा कहे ते ग्वैयाहै । सो हेजीव ! तैं गुरु जे
साहब हैं तिनके वचन मानु कौनबचन ? कि ॥ “अजहूं लेउ छँड़ाइ कालसे जो
घट सुरति सँभारै ” ॥ और दूसर शब्द न कान करु जो घट सुरति सँभारैगौ
तौ बिहङ्गम जो जीवात्मा सो कतौं न जाइगो । औगह कहे अवगाह जे साहब
हैं तिनको गहिकै गगन जो हृदयाकाश ताही में रहैगो । अर्थात् जो साहबको
गुण गान करैगो तौ तेरो मन जो सर्वत्र डोलै है सो कतौं न जाइगो तामें
प्रमाण॥“गो गणेशः समुद्दिष्टो गंधर्वो गः प्रकीर्त्तितः। गं गीतं गाचगाथा स्याद्गौ-
श्चधेनुस्सरस्वती ” ॥ ४ ॥
घघा घट बिनशे घट होई । घटहीमें घट राखु समोई ॥
जो घट घटै घटै फिरि आवै । घटहीमें फिरि घटै समावै॥५॥
घ जो घट है ताको घा जो नाश है सो करन वारो अर्थात् जनन मरण वारे
हे घघा जीव ! घट जे पांचौ शरीर ताके बिनशे घट जो है हंस शरीर सो होइहै ?
कैसे होइहै ताको साधन कहै हैं “घटही में घट राखु समोई ” कहे स्थूल
सूक्ष्ममें, सूक्ष्म कारणमें,कारण महाकारण कैवल्यमें, कैवल्य हंसस्वरूपमें, समोइ
राखुःअर्थात् एक एक में लीन कै देइ । जो यही रीतिते घट जे पांचौ शरीर
तिनको घटै घटै फिरि आवै तौ घट जो है हृदयाकाश ताहीमें घट जो हंस शरीर सो
१-ख । इन्द्रिय, आकाश, स्वर्गको कहते हैं ।
२-ग गणेश, गन्धर्व, ' गं ' गीत, ' ग ' गाथा, ' गौ ' गाय और सरस्वतीको
कहते हैं ।