कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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अथ चौंतीसी ।
ओंकार ।
ओंकार आदिहि जो जानै।लिखिकै मेटि ताहि फिर मानै॥
वे ओंकार कहै सब कोई।जिनहुँ लखा सो बिरला सोई॥१॥
चौंतीसी ।
कका कमल किरणिमें पावै।शशि विगासित संपुटनहिं आवै॥
तहां कुसुंभ रंग जो पावै । औगह गहकै गगन रहावै ॥ १ ॥
खखा चाहै खोरि मनावै । खसमहिं छोडि दशौ दिशि धावै॥
खसमहिं छोड़ि क्षमा ह्वै रहई।होय अखीन अक्षय पद गहई२
गगा गुरुके वचनै मानै। दूसर शब्द करै नहिं कानै ॥
तहां विहंग कतहूं नहिं जाई। औगह गहकै गगन रहाई॥३॥
घघा घट विनशे घट होई । घटहीमें घट राखु समोई ॥
जो घट घटै घटै फिरि आवै। घटही में फिरि घटै समावै॥४॥