कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४२० ) बीजक कबीरदास ।
सो कबीरजी कहै हैं कि मैं कासों कहौं सिगरो संसार आंधर ह्वै रह्योहैं
सांच जे परम पुरुष श्री रामचन्द्र सर्वत्र पूर्णहैं तिनसों भागो फिरै है उनको
नहीं देखैहै औ झूठा जो है धोखा ब्रह्म ताही में बँधि रह्योहै औ यथार्थ अर्थमें
चार्यों वेद छहउ शास्त्र तात्पर्य्यकैकै परम पुरुष श्री रामचन्द्रको बर्णन करै हैं
सो मैं आपने सर्व सिद्धांत में स्पष्ट करिकै लिखि दियो है ॥ ६ ॥
इति श्रीमहाराजाधिराज श्रीमहाराजा श्री राजा बहादुर
श्री सीतारामचन्द्र कृपा पात्राधिकारि विश्वनाथ
सिंह जू देव कृत तिलक शब्द समाप्त ।
इति ।
सूचना-मूल ग्रन्थमें ११५ शब्दहैं सो न जाने किस कारणसे महाराजने उसे छोड
दिया है । सो दोनों शब्द प्रस्तावनामें दे दियाहै पाठक वहांसे देख लें ।