कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द । (४१९)
औ परम पुरुष श्री रामचन्द्र अल्लाह साकेत जाहूतकें रहनवारे तिनको तौ
जानैं नहीं हैं आसमान जोहै शून्य धोखा ब्रह्म तौने की बातैं कथैं हैं कि हमहीं
ब्रह्महैं औ हमहीं बेचून बेचिगूग बेसुवा बेनिमून हैं औ उनके जिन्दगीकी मुद्दति
नियरेही है केतनौ यहै कथत कथत मरिगये केतौ मरेंगे केतौ मरे जायहे यह नहीं
बिचौरहैं कि जो खुदा होते ब्रह्म होते तौ मरि कैसे जाते सो बहुत खुदी दिलमें
रखते हैं कि खुदखाविन्द हमहीं हैं औ जो बहुत खुबी पाठ होइ तौ यह अर्थ कि
हमहीं सबते खूब कहे अच्छे हैं पै बिना पानी झूरहीमें बूडि गये अर्थात् मरिही गये
वहजो ब्रह्म खुदाको ज्ञान कियो कि हमहीं हैं सो ज्ञान झूरही ठहरयो वामें
कछु रस न ठहरयो मरतमें वह रक्षा तनकऊ न कियो जौं कहो जे साहब
खुदाको जानैंहैं ते कब जिये हैं तेऊतो मरिही जायहैं तो तुमही रामायणमें सुनै
होउगे कि जे ते भर प्रजा हैं जे ते भर भालु बांदरहैं तिनकों श्रीरामचन्द्र
सदेह आपने धामको लैगये औ श्री हनुमान्जीको बिभीषणको छोड़िगये ते
अबलों बने हैं औ कागभुशुण्ड नारद अगस्त्य बशिष्ठजी रामोपासक हैं ते अब-
लो बने हैं जो कहो अब केतो राम भक्तको मरत देखै हैं तौ जे साधनमें हैं
औ परमपुरुष श्री रामचन्द्रको नीकी भांति नहीं जानै हैं औ श्री रामचन्द्रकी
प्राप्ति नहीं भई ते शरीर छोड़िकै वह लोकको क्रमतें जाइहैं शरीर छोड़िकै फिरि
अवतार लेइहैं पुनि ज्ञान होइ है तब जाइहै औ जे परमपुरुष श्री रामचन्द्रको
अच्छी भांति जानि लियोहै औ तहांको प्राप्त होइ गये हैं तिनको शरीर छोड़ि-
बो ऐसो किं यहां गुप्त ह्वै गये पुनि कहुं प्रगट ह्वैके उपदेश करिकै जीवनकों
तारबो वे साहबको प्राप्तई हैं जब चाहैं हैं तब साहब के रहे हैं जब चाहैं हैं तब
प्रगट ह्वैके जीवनको उपदेश करिकै तारैहैं सो श्री कबीरजी प्रगटई देखाइदियो
कि काशीमें शरीर छोड़्यो मथुरा में उपदेश कियो औ चारिउ युग उपदेश
करतई हैं औ मुसल्माननके अली शरीर छोड़्यो पुनि लौटिकै आयकै संदूकमें
अपनी लाश राखिकै ऊंटमें लादिकै लैगये सो द्वै पहारके बीच ह्वै निकसे जाइ
सो वहींमें अटकाइ दियो सो अबलों वह संदूक अटकी है सो इनको चोला
छांड़िबो यहि भांति कोहै जैसे सांप केचुरि छांड़िदेइहैं ॥ ५ ॥