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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 466

( ४१८ ) बीजक कबीरदास ।
वातकथै असमानकी मुद्दति नियरानी ।
बहुत खुदी दिल राखते बूड़े बिन पानी ॥ ५ ॥
कहै कबीर कासों कहों सिगरो जग अंधा ।
सांचेसों भाजै फिरैं झूठे सों बंधा ॥ ६ ॥
हे संत सुजान! जों तुम सुजान होउ तौ वा झूठेसों न पतिआहु मेरी बात
सुनौ वह ठग जो है तिहांरो अनुभव धोखा ब्रह्म सो तेरे घटही में है धोखामें
परि आपनो स्वरूप जो साहबको दास ताको मति खोउ ॥ १ ॥ धरतीमें
कहे नीचेके लोकनमें औ असमानमें कहे ऊपरके लोकन में वही झूठे ब्रह्मका
मंडानहै औ दशौ दिशा जे हैं छः शास्त्र औ चारिवेद तिनमें वहीको
फंदहै वही के फंदते इनको जो है यथार्थ अर्थ सो कोई नहीं जानैहैं जीवके
आनिकै घेरि लियो है अर्थात शास्त्रन वदनमें अर्थ बदलि बदलि वही झूठे
ब्रह्मको उपदेश कैकै गुरुवा लोग भुलाइ दियो है सब में वही धोखही ब्रह्म
देखावैहै ॥ २ ॥ योग यज्ञ जप संयम तीर्थ व्रतदान नवधा सगुणाभक्ति
औ वेदकिताब इनसब में झूठे कहे वही धोखा ब्रह्मका बाना कहे बिरदावली
गुरुवा लोग सबकी मनावै हैं कि, या साधन कीन्हे अंतःकरण शुद्ध होय है तब
ब्रह्म कों प्राप्त होइहैं ॥ ३ ॥ औ काहूको शब्दै फुरै है कहे वेद शास्त्र
किताब कुरान पढ़िकै उनको अर्थ बदलि बदलिकै शास्त्रार्थ करिकै औरकों
हरावै है उनहींको हिन्दू तुरुके दूनों जाति मान बड़ाई करैहैं औ वोई मान
बड़ाई लैरहै हैं । पंडित मोलबीलोग औ कोई जे बैरागी हैं संन्यासी हैं
फकीर हैं औलियाहैं ते काहूको बेटादियो काहूको जागा दियो कहूं जलमें
हीठि गयो कहूं आकाशाते उड़ि गये कहूं दश पांच वर्ष कोठरी चुनाइकै आये
कहूं भूत भविष्य वर्तमान जानिलियो इत्यादिक नाना प्रकारकी करामात देखा-
इकै हिन्दू तुरुक दूनों दीनन सों मान बड़ाई लैके रहै हैं ॥ ४ ॥