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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 459

शब्द । ( ४११ )
तें प्रेतनको जूठ खाय है कहे भैरव भूत आदिकन के बलिदान खाय है उनके
दिये तपौना शराब पियै है ॥ ३ ॥
लख चौरासी जीव योनिमें सायर जात वह्यो ।
कहै कबीर सुनौहो संतौ इवान कि पूंछ गह्यो ॥ ४ ॥
श्री कबीरजी कहै हैं कि हे संतो! जीवौ सुनो तुम परम पुरुष पर जे श्रीरामचन्द्र
हैं ते तुम्हारे रक्षक संसार सागरते पार कै देनवारे जहाज तिनको छोडि श्वान
जे हैं ई सब क्षुद्रदेवता तिनकी पूंछ गहे चौरासी लक्ष योनि समुद्र संसारमें
बहो जाय है सो श्वान की पूंछ गहेते कैसे संसार समुद्रते पार जाउगे ॥ ४ ॥
इति एकसै सात शब्द समाप्त ।
अथ एकसै आठ शब्द ॥ १०८ ॥
अब हमभयलवहिरजलमीना।पुरुवजन्मतपकामदकीना१
तवमैं अच्छलो मनबैरागी।तजलो कुटुम्ब राम रटलागी॥२॥
तजलो काशी भै मतिभोरी।प्राणनाथ कहु का गति मोरी ३
हम चलिगैल तुम्हारे शरणा।कतहुं न देखो हरिको चरणा ४
हमहिं कु सेवक तुमहि अयाना।दुइ महँदोषकाहिभगवाना५
हम चलिगैल तुम्हारे पासा।दास कबिर भल कैलनिरासा ६
श्री कबीरजी कहैं हैं कि, जब मैं साहबके पास गयो तब यह बिनती
कियो कि तबतो संसार के जलकें मीनरहे अब जबते हम संसारके बहिरैं
तिहारे प्रेमजलके मीनभये प्रथम हम पूर्व जन्ममें पंचांगोपासना तपस्या बहुत
करी पुनि जब जन्मलियो तब हम को पूर्वजन्म की सुधि बनीरही वह तप-
स्याको मद कहे अहंकार हमको बहुत रहै सो वही तपस्याके प्रभावते ॥ १ ॥
तब हमको अच्छो मनमें वैराग्य रहै रघुनाथजीमें भक्ति भई तब कुटुम्बकों
छोड़िकै राम राम रट लगावत भयो ॥ २ ॥ तब प्राणनाथ मैं काशी छोड़ि-
दियो औ मेरी मति भोरी भई कहे पूर्वजन्म के तपके मदते निर्गुणरस