सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 456, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 456

( ४०८ ) बीजक कबीरदास ।
दुल्हादेव भैरव भवानी ग्रामदेवता ई सब भ्रमहैं ई सब जगत् को खाये
लेइहैं जिन जिन इनको पूजा है तिनको तिनको जड़ाइबो कहे वह काल देइहै
॥१॥ येई देव तिनके नांड है ना पिंडहै इनको अनेक जीव काटि काटि दियो
सो काह जानिकै दियो तुमको बैकलाइ डारेंगे फल ना देइँगे ॥ २ ॥ बकरी
मुर्गी देकै जो तुम इनको पूजा कीन्हों सोई आगिले जन्म तुम्हारो गर काटेंगे
॥ ३ ॥ सो श्री कबीरजी कहैहैं हे लोगो ! तुम सुनौ ये भूतनको जो तुम पूजौगे
तौ तुमहूं भूत होउगे भूतके पूजेते भूत होइहै तामें प्रमाण ॥ “ यांति देवव्रता
देवान् पितॄन् यांति पितृव्रताः । भूतानि यांति भूतेज्या यांति मद्याजिनोपि
माम् ”॥ इतिगीतायाम् ॥ ४ ॥
इति एकसै पांच शब्द समाप्त ।
अथ एकसै छः शब्द ॥ १०६ ॥
भँवर उड़ै वक बैठे आय। रैनि गई दिवसौ चलि जाय ॥१॥
हल हल कांपै बाला जीव। ना जानै का करिहै पीव ॥ २ ॥
कच्चे वासन टिकै न पानी। उड़िगे हंस काय कुम्हिलानी ३
काग उड़ावत भुजा पिरानी। कह कबीर यह कथा सिरानी ४
भँवर उड़ै वक बैठे आय। रैनि गई दिवसौ चलि जाय॥१॥
हल हल कांपै बालाजीव। ना जानै का करिहै पीव॥ २ ॥
यह जगत्में यह दशा ह्वैगई कि भँवर जेहैं रसिक संत जे परम पुरुष पर
श्री रामचन्द्रके प्रेममें छके रहे हैं ते उड़िगये कहे उठिगये अरु बक जेहैं
गुरुवा लोग ते बैठे आय जैसे बकुला मछरी खायहै तैसे ठगि ठगिकै जीवको
स्वस्वरूप खाइलेइहै कहे भुलाइ देइहै वही ब्रह्ममें लगाइकै ॥ १ ॥ सोयह
जीव तौ बाला स्त्रीकहै परम पुरुष श्री रामचन्द्र की चित्शक्ति है सो ब्रह्म
धोखामें लगिकै हलहल कांपैहै अर्थात मैं आपने स्वामीको भुलायकै धोखा
ब्रह्ममें लग्यों सो हाथ न लग्यो सो ना जानौं खफा ह्वैकै मेरे पीव कहे स्वामी
अब कहा करेंगे ॥ २ ॥