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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 453

शब्द । ( ४०५ )
क्या काशी क्या ऊषर मगहर हृदय राम बस मोरा ।
जो काशी तन तजे कबीरा रामै कौन निहोरा ॥ ५ ॥
जो हृदयमें श्रीरामचन्द्र वास कियेहैं तो क्या श्रीकाशीहै क्या ऊषरहै क्या
मगहरहै जहँ मरै तहँ मुक्ति हैजाइ तौ श्रीकबीरजी कहैहैं कि श्रीरामचन्द्रको
कौन निहोरा तेहिते मैं श्रीरामचन्द्रको निहोरा करिकै मगहर मेंही शरीर
छोड़यो मोको मगहर बाधा न कियो तेहिते हे जीवो ! तुमहूं परम पुरुष पर श्री
रामचन्द्रको हृदयमें धरौगे औ रामनाम जपोगे तौ तुमहूं को कुछ बाधा न रहेगी
जहँ मरौगे तहँ मुक्त हैजाउगे ताते और सब धोखा छोड़िकै परम पुरुष पर श्री
रामचन्द्रको स्मरण करौ मैं अजमाइकै कहौहौं जो कहो अपने शरीर छोड़िये-
की कथा श्रीकबीरजी अपने ग्रन्थमें लिखै हैं यह असम्भव बातहै तौ मगहरमें
जो श्रीकबीरजी शरीर छोडयो तौ अपनी रामोपासकता देखाइबेको मैं किगह-
रमें शरीर छोड़ौहौं कैसे यम मोको गदहा करेंगे औ कैसे मुक्त न होउँगो सो
मगहरमें मैं शरीर छोड़यो यमको कियो कछु न भयो मगहरमें शरीर छोड़ि
मथुरामें जाय रतनाकंडु इनिको उपदेश कियो है पुनि बहुतदिन प्रकट रहे हैं
याते यह देखायो कि नित्य वृन्दावनके रासमें देख्यो जाइ है जहां सब मुक्त
हैकै जाइहैं परम मुक्त है नित्य वृन्दावनके रासमें जायहैं तामें प्रमाण शुकाचार्य
मुक्त है गये हैं तिनसों श्री कृष्णचंद्र की उक्ति ॥ “स चोवाच प्रियारूपं लब्धवंतं
शुकं हरिः । त्वं मे प्रियतमा भद्रे सदा तिष्ठ ममांतिके ॥ इति पद्म पुराणे” ,, ॥
सो सब कथा आपही धर्मदासते निर्भय ज्ञानमें आपनेही मुख कमलते कह्यो
है सो स्पष्टई है ॥ ५ ॥
इति एकसौ तीन शब्द समाप्त ।
अथ एकसौ चार शब्द ॥ १०४ ॥
कैसे कै तरो नाथ कैसे कै तरो
अव बहु कुटिल भरो ॥ १ ॥
कैसी तेरी सेवा पूजा कैसो तेरो ध्यान ।
ऊपर उजर देखो वक अनुमान ॥ २ ॥