सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 450, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 450

(४०२) बीजक कबीरदास ।
श्रीकबीरजी कहैं हैं कि जो कोई यह पदको कहै है जौनै को प्रकाश यह
ब्रह्म है ऐसो जो साकेत है तौने पदको कहे स्थान को जो जानै तौ प्रमाणिक
संत वहीहै औ जेहिको प्रकाश या ब्रह्म है तौने धाममें जायकै पुनि नहीं लौटि
आवै है तामें प्रमाण ॥ “न तद्भासयते सूर्यो न शशांको न पावकः । यद्गत्वा
न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम”॥तामें कबीरऊ जीको प्रमाण ॥ “कालहि जीति
हंस लै जाहीं। अविचल देश पुरुष जहँ आहीं ॥ तहां जाय सुख होइ अपारा।
बहुरि न आवै यहि संसारा” ॥ ६ ॥
इति एकसै एक शब्द समाप्त ।
अथ एकसैदो शब्द ॥ १०२ ॥
होदारी! की लैदेउँ तोहिं गारी।तुम समुझु सुपंथ विचारी १॥
घरहूको नाह जो अपना । तिनहूं सों भेट न सपना ॥२॥
ब्राह्मण औ क्षत्री वानी । सो तिनहूं कहल न मानी ॥ ३ ॥
योगी औ जङ्गम जेते । वे आप गये हैं तेते ॥ ४ ॥
कहै कबीर यक योगी । तुम अमी अमी भो भोगी ॥ ५ ॥
होदारी!की लै देउं तोहिंगारी।तुम समुझु सुपंथ विचारी॥१॥
घरहूको नाह जो अपना। तिनहूं सों भेट न सपना ॥२॥
ब्राह्मण औ क्षत्री वानी । सो तिनहूं कहल न मानी ॥३॥
हो दारी कहे बांदी की बच्ची जीवशक्ति तोको गारी देइहौं। तैं यह मायाकी
बच्ची ह्वैकै मायाही में लगि रही है सो यह माया दारी है। जो सबको दरि डारै
सो दारी कहावै है सो तोको दरे डारै है यही के ये पेटते निकसे यहींमें लगे यह
कुपंथ है सो तैं सुपंथ बिचारु ॥१॥ घरके नाह जे परम पुरुष पर श्रीरामचन्द्र
अपना है तासों सपनेहूं नहीं भेट करै है तौ योग ज्ञान उपासनादिकन में जो
नाह वर्णन किये हैं तेतो जारहैं जो तोको मिलिबो करेंगे दश दिनको तौ फेरि