कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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श्रीकबीरजी कहै हैं कि मैं तो स्पष्टई कहौहौं पै यह पद जो साकेत लोक
ताको कोई विरला बूझै है सो यह देखि देखि मोको बड़ो आश्चर्य होइ है
॥ १ ॥ जब महाप्रलय होय है तब धरती उलटिकै आकाशको जात रहैहै
कहै पृथ्वी जलमें जल तेजमें तेज वायुमें वायु आकाशमें समाइ जाइहैं अरु
वही जो है आकाश सो अहङ्कारमें समाइ है अरु अहङ्कार महत्तत्त्व में समाइहै
सो महत्तत्त्व मनहै काहेते कि यह सब बिस्तार मनहीं को है सो महत्तत्त्व
जो है आदि कारण मन हाथी सो भगवत् आपना रूप जो है जगतकी मूल-
शक्ति सूक्ष्म चींटी ताके मुख में समाइ है ॥ २ ॥
बिन पवनै जहँ पर्वत उड़ै। जीव जंतु सब बिरछा बुड़ै ३
सो वह साहबकै अज्ञान रूपा मूल प्रकृति लोक प्रकाशमें जो समष्टि जीवहैं
तहां समानी रहै है पृथ्वी आदिक तो समाइ गये हैं उहां पवन नहीं है परन्तु वह
चैतन्याकाश कहे ब्रह्मरूपी आकाश मे अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड जे पर्वत हैं ते
उड़तई रहै हैं अरु वही सरवरमें जीव जन्तु ते सहित जे संसार रूपी वृक्षहैं ते
बूड़ैहैं अर्थात वही ब्रह्ममें सब संसारकी लय होय है ॥ ३ ॥
सूखे सरवर उठै हिलोल। बिनु जल चकवा करै कलोल४
बैठा पण्डित पढ़ै पुरान। बिन देखे का करै बखान ५
वह ब्रह्मतो सूखा सरोवरहै अर्थात् सो ब्रह्म महींहौं यह मानिबो मिथ्या है
लोक प्रकाश ब्रह्म सत्य है तौने के प्रकाश की हिलोर उठै है तहां वाणीरूपी
जल तौ है नहीं औ चकवा जे जीवहैं ते कलोल करै हैं कहै वहैंते पुनि
बाणीको उत्पत्ति करिकै संसारी है जाइहैं ॥ ४ ॥ पण्डित जे हैं ते बैठै
पुराण पढ़ै हैं अरु उत्पत्ति प्रलयको सब बखान करै हैं यह तो नहीं समुझै हैं
कि वह तो बिन देखे का है कहे शून्य है जो हम ज्ञान उपदेश करिकै वहिं
ब्रह्ममें लगावैगे तौ भगवत् अज्ञान रूपी कारणशक्ति तौ उहां बनिही है माया
फेरि न धरि लै आवैगी ॥ ५ ॥
कह कबीर जो पदको जान। सोई संत सदा परमान ६
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