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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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( ४२ ) रमैनी ।

वार ॥ १६ ॥ रमैनी ॥ नवदरवाजाभरमविलास ॥ भरमहि-
वावनबहेवतास ॥ ^१०६कैंनउजबावनभूतसमान ॥ कहं लगिगनों
सो प्रथमउडान ॥ माया ब्रह्मजीवअनुमान ॥ मानतही मालि-
क बौरान ॥ अकबकभूतवके परचंड ॥ व्यापि रहा सकलों
ब्रह्मांड ॥ ई भर्म भूत की अकथकहानी ॥ ^१०७गोत्योजीवजहांन-
हिंपानी ॥ तनकतनकपरदौरे बौरा ॥ जहांजायेतहंपावेन-
ठौरा ॥ साक्षी ॥ योगी रोगीभक्तबाबरा, ज्ञानीफिरे
^१०८निखटू ॥ संसारीको ^१०९चैन नहींहै, ज्योंसरांयकाटटू ॥ १७
रमैनी ॥ इतैंउंतदौरैसबसंसार ॥ छुटेनभरमकिआउपचार ॥
जरैजीवकोबहुरिजरावै ॥ काटे ऊपर लोनलगावै ॥ योगी
ऐसी हालबनाई ॥ ^१११उलटी वत्ती नाक चलाई ॥ कोइविभूति-
मृगछालाडारे ॥ अगमपन्थकी राहनिहारे ॥ काहूको जलमां-
झसुतावे ॥ कहंरतहीं सबरैनगंवावै ॥ भगती नारी कीन
श्रृंगार ॥ बिन प्रिया परचै सबै अंगार ॥ एकगर्भ ज्ञानअनु-
मान ॥ नारि पुरुषकाभेदनजान ॥ संसारीकहूंकलनाहिंपावे
॥ ^११२कहरतजगमेंजीवगंवावे ॥ चारिदिशामें मंत्रीझांरे ॥
लियेपलीतामुलनाहारे ॥ जरैनभूतबड़ो वरि^११४खारा ॥ काजी
पण्डित [पचिपचि] पढ़िपढ़ि हारा ॥ इन दोनोंपरएकै भूत ॥
झारेंगे क्यामाकी चूत ॥ साक्षी ॥ भूत नउतरे भूतसों, सन्तों
करोविचार ॥ कहैंकबीरपुकारिके, बिनुगुरु नहिंनिस्तार ॥
साक्षी॥परमप्रकाश ^११५भाँसजो, होत ^११६प्रौढाविशेष॥ तद् प्रकाश

१०६ अक्षर १०७ डुबाया ॥ १०८ उदास ॥ १०९ सुख ॥ ११० यहां
बवां ॥ १११ नेती धोती बाहर कराता है ॥११२ हाय २ करतें २ ॥
११३ पंडित लोग ॥ ११४ मजबूत बलीबलवान ॥ ११५ अध्यास
॥ ११६ दृढ़ ॥