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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 44

रमैनी । ( ४१ )
परसततोहिहेत ॥ बौवन तीसंबरन निरमान ॥ हिन्दू तुरुक
दाऊभरमान ॥ साक्षी ॥ भरमिरहेसब भरममहं, हिंदू-
तुरुकबखांन ॥ कहहिंकबीरपुकारिकै, बितुगुरूकोपहिचान
॥ १४ ॥ रमैनी ॥ भरमत भरमतसबै भरमाने ॥ रामसनेही
बिरलेजाने ॥ तिरदेवा सबखोजतहारे ॥ सुरनरमुनिनहिपा-
वतपारे ॥ थकितभयातबकहावेअन्ता ॥ विरहैंनिनारिरही
बितु कैन्ता ॥ कोटिनतरक करें मनमाहीं ॥ दिलकी दुबिधा
कतहूँनजाही ॥ कोई नख शिखजटा बढ़ावै ॥ अरमिभरमि-
सबजहँतहँधावैं ॥ बाटनसूझै भईअँधेरी ॥ होयरहीबानी कीं
चेरी ॥ नाना पन्थ बरनिनहिंजाई ॥ ( जातिकर्म गुन नाम
बड़ाई ) जाति वरणकुलनामवड़ाई ॥ रैन दिवसवे ठाँठेरहहीं
वृक्ष पहारकाहेंनहितरहीं ॥ साक्षी ॥ खेसमनचीन्हे बावरी,
परपूरुषलौलीन ॥ कहंहिकबीर पुकारके परीनबानीचीन
॥ १५ ॥ रमैनी ॥ कैनरसकी मतवालीनारि ॥ कुँटनीसेखो-
जे लैंगवारि ॥ कुटनीआंखिन कौंजरदियऊ । लागिवैंतावन
ऊपरपीयऊ ॥ काजरलेकेहूवैगईअंधी ॥ समुझनपरीबाँतेंकी
१०४ संधी ॥ बाजेकुटनीमोरे १०५ मँटकी ॥ ई सब छिनरोतामहँअ-
टकी ॥ विरहिनिहोय के देहसुखावै ॥ कोई शिरमह केशब-
ढ़ावै ॥ मानि मानि सब कीन्ह सिंगारा ॥ बिनपियपरसैंस-
बैंअंगारा ॥ साक्षी ॥ अटकीनारिछिनारि सब, हर-
दम कुटनीद्वार ॥ खसम न चीन्हेबावरी, घरघरफिरतखु-
९२ संस्कृत वर्णमाला के ५२ अक्षर ॥ ९३ मुसलमानीवर्णमाला के
३० अक्षर ॥ ९४ मुसलमान ॥ ९५ वियोगिन ॥ ९६ पिया मालिक ॥
९७ खड़े ॥ ९८ मालिक ॥ ९९ बाणी ॥ १०० गुरुआ लोग ॥
१०१ आशना, जार ॥ १०२ झूठा उपदेश ॥ १०३ उपदेश करने
लगी ॥ १०४ मिलावट ॥ १०५ इशारा ॥