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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 447

आवत संग न जातको साथी। काह भयो दल साजे हाथी ५
मायाको रस लेइ न पाया। अंतर यम बिलार है धाया ६
कहकबीरनरअजहुंनजागा।यमकोमोंगरामधिशिरलागा ७
श्री कबीरजी कहै हैं कि, हे जीवौ ! जैसो या पदमें कहि आये हैं तैसों
तिहारो हवाल ह्वै रह्यो है । जो तुम परम पुरुष पर श्रीरामचन्द्रको नै जानौगे
तौ तिहारे शिरमें यमको मोगदरलगैगो ॥१॥ ७॥
इति निन्यानबे शब्द समाप्त ।
अथ सौ शब्द ॥ १०० ॥
देखौ लोगो हरिकी सगाई । माय धरै पुत धिय संग जाई १
सासु ननदि मिलि अदल चलाई।मादरिया गृह बेटी जाई २
हम वहनोइ राम मोर सारा । हमहिं वाप हरि पुत्र हमारा ३
कहै कबीर हरीके बूता । राम रमैतैं कुकुरि के पूता ॥ ४ ॥
हे जीवो ! सब संसारकी सगाई न देखो दुःखकै हरैया जे हरि हैं
तिनकी सगाई देखो । अर्थात् साहबमें लागो तो वे संसार दुःख दूरि करि
देहिंगे । जो संसारमें लागोगे तो माई जो माया सो तुमको धरैगी तुम जीवो
वा मायाको पुत्र ह्वै रह्यो है । समष्टि ते व्यष्टि जीव मायाही कैरहै यातै
मायाको माय कह्यो है अब जीवके बुद्धि उत्पन्न होयहै यातै जीवकी धी कहे
कन्या है । सो तैं बुद्धिके संग बिगरि गयो और और में बुद्धि निश्चय कराइ
नरकमें डारि दियो ॥ १ ॥ बुद्धि कर्म की बासना ते उत्पत्ति होय है जौनै
प्रकारकी बासना होय है तैसी बुद्धि होइ है सो बासना जीवकी सासु है औ
जीवकी सुरति बहिनी है काहेते कि, वही सुरति पाइकै जीव चैतन्य भयो है
संसारी भयो है औ वह सुरति जब साहब मुख होइगी तब साहब को पावैगो सो
येई जे हैं बुद्धिकी सासु ननँदि हैं तेई अदल जो हैं हुकुमसो चलाइकै शुद्ध समष्टि