कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 442, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३९४ ) बीजक कबीरदास ।
अथ सत्तानबे शब्द ॥ ९७ ॥
अल्लह राम जीव तेरी नाईं ।
जन पर मेहर होहु तुम साईं ॥ १ ॥
क्या मूड़ी भूमिहिशिरनाये क्या जल देह नहाये ।
खून करै मसकीन कहावै गुणको रहै छिपाये ॥ २ ॥
क्या भो वजू मज्जन कीन्हे क्या मसजिद शिरनाये ।
हृदया कपट निमाज गुजारै कह भो मक्का जाये ॥ ३ ॥
हिंदू एकादशि चौबिस, रोजा मुसलम तीस बनाये ।
ग्यारह मास कहौ किन टारौ ये केहि माहँ समाये ४॥
पूरब दिशि में हरिको वासा पश्चिम अलह मुकामा ।
दिलमें खोज दिलैमें देखो यहै करीमा रामा ॥ ५ ॥
जो खोदाय मसजिदमें बसतुहै और मुलुक केहि केरा।
तीरथ मूरति राम निवासी दुइ महँ किनहुं न हेरा॥६॥
वेद किताव कीन किन झूठा झूठा जो न विचारै ।
सब घट माहँ एक करि लेखै भै दूजा करि मारै ॥७॥
जेते औरत मर्द उपाने सो सब रूप तुम्हारा ।
कबिर पोंगड़ा अलह रामका सो गुरु पीर हमारा ८॥
अल्लह राम जीव तेरी नाईं । जन पर मेहर होहु तुम साईं १
श्रीकबीरजी कहै हैं कि, हे श्रीरामचन्द्र ! कोई तुमको अल्लाह कहैहै कोई
रामकहैहै हिंदू मुसल्मान दोउनमें शरीरभेद है जीव तो एकईहै सबमें
बिभु चैतन्य तुमहौ। अरु चैतन्यजीव है सो ज्योति तुम्हारी है हिंदू मुसल्मानको
आत्मा तुम्हारी है तुमदूनोंके साईंहौ ताते तुम्हारे जन जे हैं हिंदू तुरुक दोऊ हैं
तिनके ऊपर मेहरवानी करौ अर्थात् दयाकरौ ॥ १ ॥