सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 43

( ४० ) रमैनी ।
भरमबढ़ीशिरकेशबढावै ॥ तकेगगन कोइ बांह उठावै ॥ दैता
री करनाशाग है ॥ भरमिकगुरू बतावै लहै ॥ भरम बढ़ी अरु
घूमन लागे ॥ बिनु गुरु पारख कहु को जागे ॥ साक्षी ॥
कहैं कबीर पुकारके, गहहुशरणतजिमान ॥ परखावे गुरभर-
मको, बानि खानिसहिदान ॥ ११ ॥ रमैनी भरमजीव परमा
तममाया॥भरमदेहऔ भरम र्निकाया ॥ अनहदनाद औ ज्यो
ति प्रकास ॥ आदिअन्तलौभरमहि भास ॥ इत उत करे भरम
निर्रमान ॥भरम मान औभरमअमान॥कोहं जगतकहांसे भया॥
ईसबभरम अतीनिरमया ॥ प्रंलय चारि भ्रमपुण्य औ पाप ॥
मन्त्रजापपूजाभ्रमथाप ॥ साक्षी ॥ बाट बाट सब भर्म है,
माया रचीबनाय ॥ भेद बिना भरमें सकल,गुरु बिन कहांल-
खाय ॥ १२ ( बापपूत दोउ भरमहै, मायारची बनाय ॥ भेद
बिनाभरमे सकल, गुरु बिनकहाँलखाय ) ॥ साक्षी ॥
बापपूत दोऊ भरम, औधकोश नवपांच ॥ बिन गुरु भरम
नछूटे, कैसे आवैसांच ॥ १३॥ रमैनी ॥ कैलमा बाँग निर्माज
गुजारे॥भरमभई अल्लाहपुकारै ॥ अजबभरम एकभईतमासा॥
लाँ मुकाम बेचूँननिबासा ॥ वेनैमूनवहसब केपारा॥ आँखि-
रताको करे दिर्दारा ॥ रगड़ैनाक मँसजिदअचेत ॥ निंदे बुँत
७९ स्थित ॥ ८० नित्य प्रलय १ नैमित्तिक प्रलय २ महाप्रलय ३ आत्यं
तिक प्रलय ४ ॥ ८१ अधामात्रौ ॥ मुसलमानो का गुरु मन्त्र ला एला इलि-
ल्लाह मुहम्मदुर्रसू लिल्लाह ॥ ८३ अजान जो निमाज पढ़ने के थोड़ीही पहले
निमाज के समय सूचन करने को कलमा श० पुकारते हैं ॥ ८४ जो खुदा
के प्रार्थना पांच समय दिन और रात्री पढ़ते हैं पश्चिम मुह होंकर ॥ ८५
स्थान रहित ॥ ८६ निराकार ॥ ८७ अद्वितीय ॥ ८८ क्यामतके दिन,सृष्टि
के अंत में जब खुदा सबका न्याय करेगा ॥ ८९ दर्शन ॥ ९० मुसलमानों
के नेमाज पढ़ने की जगह ॥ ९१प्रतिमापूजक ॥