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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 436

( ३८८ ) बीजक कबीरदास ।
है यातें मन बचनके परे आत्मा होवई चहै अरु जब मैं हंसस्वरूप देउहौं
तामें स्थितह्वैकै मेरे पास आवते कल्पनाकारकै नानारूप में न लगते ॥२॥३॥
भरथरिगोरखगोपीचंदा।तामनमिलिमिलिकियोअनन्दा ४
जामनकोकोइजाननभेवा।तामनमगन भये शुकदेवा ॥५॥
भरथरी गोरख गोपीचंद जे हैं ते वही मनहीं में मिलिकै आनंद कियो
अर्थात् जौने ब्रह्ममें मिलिकै आनन्द कियों सो ब्रह्ममनहींको अनुभव है ॥४ ॥
सो जौने मनको अनुभव ब्रह्म होइ है अरु वह ब्रह्म उपास्यकनमे अर्थ
अपनी नाना ईश्वर स्वरूप कल्पना करैहै तौने मनको भेद कोई नहीं
जान्यों तौने मनके मगनमें कहे; राह में शुकदेव ना भये गर्भहीते मायाको
त्यागि दियो औ सनक सनकादिक प्रह्लादादिक बहुत श्रमकरिकै फेरि फेरि
समुझ्यो है सो साहब कहै है कि मोको जानिके मेरे पास आये । इहां
रामोपासक शुकदेव को छूटिगये जो कह्यो तौ रामोपासक सब आइ गये॥५॥
एकलनिरंजनसकलशरीरा।तामेंभ्रमिभ्रमि रहलकबीरा॥६॥
एक जो है निरंजन ब्रह्म सर्वव्यापी तिनहीं को नानाशरीर नारायणादिक
महेशादि रूपहै तिनहीं में सिगरै कबीर कायाके बीर भ्रमि भ्रमि रहतभये
कहे उनहींकी उपासना करतभयें अपनो रूप औ मेरो रूप न जानत भये अरु
ब्रह्म नानारूप कल्पनाकारि लियो है तामें प्रमाण ॥ “उपासकानां कार्यार्थं ब्रह्मणो
रूपकल्पना”॥ याको अर्थ मेरे सर्व सिद्धांतमें है औ रामोपासक शुकदेवको कहि
आये हैं सो शुकाचार्य्यई मुक्त ह्वैगयेहै तामें प्रमाण ॥ “शुको मुक्तो वामदेवो वा
इति श्रुतेः” ॥ औ रामोपासक रहै हैं तामे प्रमाण ॥ “पादाम्बुजं रघुपतेः शरणं
प्रपद्ये” ॥ इति भागवते ॥ औ कवीरजीको प्रमाण ॥ “आदिनाम शुकदेवजो
पावा। पूर्वजन्मके कर्ममिटावा” ॥ ६ ॥
इति बानवे शब्द समाप्त ।