सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 434, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 434

( ३८६ ) बीजक कबीरदास ।
छोड़ै है जो जेतो पायो है सो वहीको सांच मानिकै सांचपदार्थ को नहीं जानै
है दुःखहीके कारण शुकाचार्य गर्भमें मायाको त्यागिदियो । शुकाचार्य गर्भमें
बारहवर्षके द्वैगये सो गर्भते न निकसैं कहैं कि जो हम निकसैंगे तौ हमको
माया लगि जायगी तब ब्रह्मादिक देवता सब जुरे आय न निकसे तब भगवान्
आइ कह्यो कि बरदाके सींगमें सरसों धरि देइ जब भर सरसों सींगमें रहै है
यतने काल भरमाया हम खैंचेले हैं निकसिआ ओ सो शुकाचार्य निकसे नारासहित
बनको चलेगये साहबको मिले जाइ ॥ २ ॥
योगी दुखिया जंगम दुखिया तापसको दुख दूना ।
आशा तृष्णा सबघट व्यापै कोई महल नहीं सूना॥३॥
सांच कहौं तो सबजग खीझै झूठकहो नहिं जाई ।
कह कबीर तेई भे दुखिया जिन यह राह चलाई ॥४॥
योगीजंगम सबदुखियाहैं अरु तापसको तो दूनदुःखहै काहेते कि आशा
तृष्णा सबके घटमें व्यापै है कोई महल सूननहीं है काहूको हृदय आशातृष्णाते
सून नहीं ह सबके हृदयमें आशा तृष्णा व्यापि रही ह ॥ ३ ॥ श्रीकबी-
रजी कहैं हैं कि अपने अपने मतमें जीव लगे हैं सांच मानिकै जो सांचको
हम कहै हैं कि सांच जे परमपुरुष परश्रीराम चन्द्रहैं तिनमें लगौ जिनको तुम
जानि राख्यो है ते असांचहैं तो खीझै हैं औ मोसों झूठ कह्यो नहीं जाइहै सो
जे जे गुरुवा लोग अपनी अपनी मतकी राह चलाई हैं ते दुखिया द्वै गये हैं
तौ जिनको वे शिष्य बनायो है ते दुखिया काहे न होइँ ॥ ४ ॥
इति इक्यानबे शब्द समाप्त ।
अथ बानबे शब्द ॥ ९२ ॥
गुरुमुख ।
ता मनको चीन्हौ रे भाई । तनु छूटे मन कहां समाई॥१॥
सनक सनंदन जयदेव नामा। अंबरीष प्रहलाद सुदामा ॥२॥
भक्त सही मन उनहुं न जाना।भक्तिहेतु मन उनहुं न ज्ञाना३