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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 433

शब्द । ( ३८५ )
तिनको झगरा देखता कौन है जो सबके ऊपर होइहै सो साहब कहैं हैं कि जि-
नको मैं हंसस्वरूप दियो है मेरे पास पहुंचे हैं ते सबके ऊँचेहैंकै उनको झगरा
देखते हैं औ हँसते हैं कि सांच साहबतो एकई हैं ताको जानै नहीं हैं
आपसमें झगरते हैं ॥ २ ॥
इति नब्बे शब्द समाप्त ।
अथ इक्यानबे शब्द ॥ ९१ ॥
जो देखा सो दुखिया देखा तनु धरि सुखी न देखा ।
उदय अस्तकी बात कहतहौं ताकर करहु विवेका ॥ १ ॥
बाटे वाटे सबकोइ दुखिया क्या गिरही बैरागी ।
शुकाचार्य दुखहीके कारण गर्भे माया त्यागी ॥ २ ॥
योगी दुखिया जंगम दुखिया तापसको दुखदूना ।
आशा तृष्णा सबघट ब्यापै कोई महल नहिं सूना ॥ ३ ॥
सांच कहौं तौ सब जगखीझै झूठ कहो नहिं जाई ।
कह कबीर तेई भे दुखिया जिन यह राह चलाई ॥ ४ ॥
जो देखा सो दुखिया देखा तनुधरि सुखी न देखा
उदय अस्तकी बात कहतहौं ताकर करहु विवेका ॥ १ ॥
जाको संसारमें देखै हैं ताको सबको दुखिये देखैं तनुधरिकै सुखिया काहूकों
नहीं देखा काहेते कि गर्भते जो जीव निकस्यो तो माया लपटि जाती है सों
उदय अस्त कहे सब संसारकी बात कहौंहौं अरु ताकर तुम विवेक कर-
त जाउ ॥ १ ॥
बाटे वाटे सब कोइ दुखिया क्या गिरही बैरागी ।
शुकाचार्य दुखहीके कारण गर्भे माया त्यागी ॥ २ ॥
आपने आपने वाटमें कहे आपने आपने मतमें सबको दुखिया देखते हैं क्या
गिरही क्या बैरागी अर्थात् त्रिगुणके मतमें सब परे हैं मायाको दुःख कोई नहीं
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