कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३८४ ) बीजक कबीरदास ।
बाशिष्ठ शिष्ठ विद्या संपूरण राम ऐसे शिष शाखा ।
जाहि रामको करता कहिये तिनहुंक काल न राखा ॥ ४ ॥
अरु योग युक्तिको अनुमान करिकै गोरख पवनराखै नहीं जान्यो कहैं प्राण
चढ़ावै नहीं जान्यो काहेते किं ऋद्धिं सिद्धि संयममें लागिगये ब्रह्मके पार जें
साहब हैं । तिनको न जान्यो ॥ ३ ॥ औ वशिष्ठ जे हैं संपूर्ण विद्यामें श्रेष्ठ
तिनके राम ऐसे कहे श्रीरामचन्द्रहीके बरोबर रघुवंशी जिनमें शिष्य शाखा-
भये तिनहूंको काल नहीं राख्यो अर्थात् यह शरीर उनहूंको न रह्यो औ
राजन में जिनको राम को कर्त्ता कहै हैं कि श्रीरामचन्द्रको जे उत्पन्न कियो
है ऐसे दशरथौको काल न राख्यो । इहां गोरख आदिक योगी दत्तात्रियादिक
ज्ञानी वशिष्ठ आदिक ब्रह्मर्षि ई सबते श्रेष्ठ हैं । याते संयोगी ज्ञानी ब्रह्मर्षि
पृथ्बीके आइगये औ दशरथ महाराजको श्रीरामचन्द्रके बिछोह होत प्राण
छूटिगयो सो ये सब राजर्षिते श्रेष्ठ हैं ताते दशरथ महाराज के कहे सब
राजर्षि पृथ्वीभरके आयगये तिनहूंको काल न राखत भयो अर्थात् शरीरधारी
कोई नहीं रहि जाइ है कोई योगकरि जो जियो तो ब्रह्माके दिन भर जियो
महाप्रलयमें जब ब्रह्माको नाश द्वै जाइ है तब ब्रह्मांडई नहीं रहै है और कोई
कैसे रहै सो हंस समाधि लैके मिलत है ॥ ४ ॥
हिन्दू कहै हमें लै जरवै तुरुक कहै मोर पीर ।
दूनों आइ दीन मों झगरैं देखै हंस कबीर ॥ ५ ॥
जाको हंसस्वरूप साहब देईहै सो हंस स्वरूपमें स्थित द्वैकै साहबके पास
जाइहै । सो साहब कहै है कि जो मोको जानै तौनैं हंसस्वरूप देउँ तामें स्थित द्वैकै
मेरे पास आवै । सो मोको तो जानै नहींहै हिंदू कहै हैं कि हम वह ज्ञानाग्नि कैकै
सबकर्म जारि देइँगे ब्रह्म होइ जाइँगे औ मुसल्मान कहै हैं कि पिरान जाहिर जो मक्का
है तहां हमारो पीरहै हमारे खाबिंदहैं ते हमार कर्म सब जारि देइँगे। फिरि दोनों
आइ दीनमें झगरेँ हैं वे कहै हैं कि तुम्हारा खोदाय झूठाहै वे कहै हैं कि तुम्हा-
रा ईश्वर झूठा है सो जीवात्मा तौ मेरो बंदाहै सो आपने स्वरूपको जानिकै
मोको जानै नहीं है आपने आपने अनुमानकरि आपने खाबिंद बनाइ लिये हैं