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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 428

( ३८० ) बीजक कबीरदास ।
ऐसी वाकी मांसुरे भाई पल पल मांसु बिकाई ।
हाड़ गोड़ लै घूर पँवारै आगि धुवां नहिं खाई ॥ ३ ॥
शिर औ सींग कछू नहिं वाके पूंछ कहां वह पाई ।
सब पण्डित मिलि धन्धे परिया कविर वनौरी गाई ॥४॥
सावज न होइभाई सावज न होइ।वाकी मांसु भखैसब कोई १
साहब कहैं हैं कि, जेहि शब्द ब्रह्ममें तुम लगे हौ और तुमको वही भुलाय
दियो सो सावज न होइ तैने शब्दको तात्पर्य तुम नहीं बूझो वहीके मांसको
तुम सब भक्षौहौ कहे बाणी सब कहौहौ औ वही मांस सब जगत्है ताहीको
भक्षौहै कहे भोग करौहौ अरु वाको तात्पर्य सत्य पदार्थ जो मैंहौं ताको नहीं
जानौहौ संपूर्ण बाणीको बिस्तार असत्यहै मैंहीं सत्यहौं ॥ १ ॥
सावज एक सकल संसारा अबिगति वाकी बाता ।
पेट फारि जो देखिये रे भाई आहि कलेज न आता २
सो वाको पेट फारिकै जो देखिये अर्थात् जो वाको विचारिकै देखिये तात्प-
र्य्यते तो जो तुम बिचार करिराख्यो है कि शब्द ब्रह्मके अर्थ को सारांश कलेज
निर्गुण ब्रह्म है सो नहीं है वेदतो तात्पर्य ते मोको बर्णन करै है अरु त्रिगुण
माया आंतहै सो वाकी बात अबिगति है कहे अव्यक्त है काहूके जानिबैं योग्य
नहीं है जो मोको जानै है सोई वह सावज को जानै है ॥ २ ॥
ऐसी वाकी मांसुरे भाई पल पल मांसु बिकाई ।
हाड़ गोड़ लै घूर पँवारै आगि धुवां नहिं खाई ॥ ३ ॥
पल का कहावै है सो वह शब्द ब्रह्मकी मांसु जो हैबाणी सोहे भाइउ! ऐसी
है कि, पल पल कहे टका टका कों बिकोइहै अर्थात् को बिकाईहै तामें प्रमाण॥
"कबीरजीकों चौरासी अंगकी साखी॥" "गली गली गुरुवा फिरैं दिक्षा हमरी लेहु ।
कीं बूड़ौ की उबरौ टका परदनी देहु"॥ थोरे थोरे अक्षरके मंत्र गुरुवा लोग
देइहैं औ शिष्यनसौं धन लेइहैं अरु केवल शब्द ब्रह्मैते मुक्ति नहीं होइहै तामें