कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३७६ ) बीजक कबीरदास ।
लोग जाहूत कहे हैं। तहांलों ब्रह्म ज्योतिकी डोरी लगी है वही डोरीकों मक्र-
तार कहैहैं सो वह मक्रतार सुषुम्णामें लगोहै जब परमगुरु रामनाम बताई है
तब बही सुषुम्णा हैकै मक्रतारकी डोरी हैकै साहब के लोक जाय है तहां-
अजब तमाशा कौनहै कि उहांके त्रिगुण गुल्म लता देखे तो पांचभौतिकं से
परेहै पै पांचभौतिक नहीं है आनंदरूप है ॥ ८ ॥
सब अवतार जासु महि मंडल अनँत खड़ो कर जोरे ।
अद्भुत अगम अथाह रचो है ई सब शोभा तोरे ॥ ६ ॥
सकल अवतार औ ईश्वर अनंत जिनके आगे कर जोड़े खड़े हैं वह साहब
लोक कैसो है अद्भुतहै कहे आश्चर्य है बचनमें नहीं आवै है औ अगमहै कहे
उहां काहूकी गम नहीं है औ अथाह है कोई बर्णन करिकै थाह नहीं पायो कि
यतनैहै सो हे जीव! यह सब शोभा तोरे साहबकी है तेरे देखिबे योग्यहै काहेते
कि साहबौ द्विभुजहै औ तैंहूं द्विभुजहै और तो सब ईश्वर अवतार कोई अष्टभुज
कोई चतुर्भुज मत्स्य कूर्म इत्यादिक हैं अथवा साहबके लोकमें जे ईश्वर अव-
तार आदिक हैं ते सब अपनी शोभाको मंडल तोरे हैं अर्थात् उनकी शोभा
साहबकी शोभाते मंद देखि परैहै ॥ ६ ॥
सकल कबीरा बोलै वीरा अजहूं हो हुशियारा ।
कह कबीर गुरु सिकिली दर्पण हरदम करो पुकारा ॥१०॥
हे सब कबीरौ! कायाके बीर जीवौ वही बीरा लेऊ अर्थात् परम पुरुष पर
जे श्रीरामचन्द्रहैं तिनको बीरालेउ अजहूं हुशियार होऊ जे मतनमें गुरुवा
लोग समुझाइ समुझाइ लगाइ दिये हैं तिन मतनमें जब भर तुम रहौगे तब
भर तुम्हारो जन्म मरण न छूटैगो ताते मतनको छोड़िदे सुरति कमलमें जेपरम
गुरुहैं ते सिकिलीगरहैं तुम्हारे अंतःकरण साफ करिबेको ते राम बतावै
हैं सो वा राम नाम सुनिकै हरदम पुकार करो तब साहबके इहां पहुंचौ
अरु सब अवतार ईश्वर उनके द्वारे हाथ जोरे खड़े हैं तामें प्रमाण शिवसंहि-
तामें हनुमान्जी प्रति अगस्त्यजी कहै हैं ॥ “आसीनं तमयोध्यायां सहस्र-
स्तम्भमंडिते । मंडपे रत्नसंज्ञे च जानक्या सह राघवम् ॥ मत्स्यःकूर्मःकिरि-