कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३७० ) बीजक कबीरदास ।
तिहारी स्त्री तो जन्मकी शूद्रिनिहै सो परुसैहै औ हे पांडे ! तुम खाउहौ तातें
तुम कैसे ब्राह्मण भये ब्राह्मण तौ ब्रह्म जानेते कहावैहै ॥ ३ ॥
हिन्दू तुरुक कहांते आया किन यह राह चलाई ।
दिलमें खोज खोजु दिलहीमें भिश्त कहां किन पाई॥४॥
आत्मातौ एकईहै हिंदू तुरुक ये शरीरके भेदहैं यह शरीर कहां ते आयोहै
औ यह राह कौन चलायो है अर्थात् बीचैते आये हैं बीचैते जायँगे सो दिलमें
तुम खोजौ उसका खोज दिलही में है औ कौन भिश्त पायोहै अर्थात् खोदा-
यका बंदा जो तिहारो जीवात्मा है जो हिंदू तुरुकमें एकई है सो तिहारे दिल-
हीहै उसको जानो तो जानि परै उसके मिलनको खोज कहै राह वही
आत्माहै जब आपने स्वरूपको जानोगे तब वाको पावोगे ॥ ४ ॥
कहै कबीर सुनो हो संतो जोर करतु है भारी ।
कविरन ओट रामकी पकरी अंत चला पचिहारी ॥५॥
कबीरजी कहैहैं कि हे संतौ! सुनौ