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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 395

शब्द । ( ३४७ )
अथ इकहत्तरवां शब्द ॥ ७१ ॥
गुरुमुख ।
चातक कहा पुकारै दूरी । सो जल जगत रहा भरपूरी ॥१॥
जेहि जल नाद विन्दु का भेदा। षटकर्मसहितउपान्यौवेदा २
जेहि जलजीव सीव का वासा। सो जल धरणि अमर परकासा ३
जेहि जलउपजेसकलशरीरा। सो जल भेद न जान कबीरा॥४॥
चातृक कहा पुकारै दूरी। सो जल जगत रहा भरपूरी ॥ १ ॥
जेहि जल नादविन्दु का भेदा। षटकर्मसहित उपान्यौवेदा २॥
सबते गुरु परमपुरुष पर श्रीरामचन्द्र कहैहैं कि, हे चातक दूरि दूरि तैं कहा
पुकारै है कि पियासोहौं पियासोहौं जैन स्वातीको जल तैं चाहैहै जाते पियास
बंद है जाइहैं सो राम नाम रूपी जल स्वातीको मुख्य मुक्तिको साधन जगत्में
पूरि रह्यो है तैं कहां और और मुक्तिको साधनको खोजत फिरैहै ॥ १ ॥ औ
जौने रामनामरूपी जलमें नादबिंदु को भेद है अपने षट मात्रनते वेदको उपान्यौ
कहै उत्पत्ति कियो है ॥ २ ॥
जेहिजलजीवसीवकावासा। सो जल धरणिअमरपरकासा ३॥
जेहिजलउपजेसकलशरीरा। सो जलभेदनजानकबीरा ॥४॥
जौने रामनामरूपी जलमें जीव जेहैं सीव जे नानाईश्वर तिनको बासैहै औ
सोई रामनामरूपी जब धरणि में जो कोई जैपै ताको अमर करै है या प्रकाश
कहै जाहिरहै अथवा वा अवनीमें नाशमान नहीं होयहै या जाहिरहै
तैं पियासो काहे मरै है ॥ ३ ॥ जेहि राम नामरूपी जलते सकल शरीर उप-
जै है अर्थात् संसारमुख अर्थते अनन्त ब्रह्मा उपजै हैं रामनामरूपी जलको भेद
कबीरा कहै कायाके बीर जे जीव हैं ते नहीं जानै हैं अर्थात् जो रामनाम
मोको बतावै है सो जो विचार करै तौ चिद्विग्रह करिकै सर्वत्र महीं देखों
परौं तौ मेरी भक्ति जलपान करिकै मुक्ति है जाइ है । औ संसारताप बुताइ
जाइ है ॥ ४ ॥
इति इकहत्तरवां शब्द समाप्त ।