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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 396

( ३४८ ) बीजक कबीरदास ।
अथ बहत्तरवां शब्द ॥ ७२ ॥
चलहु का टेढ़ो टेढ़ो टेढ़ो ।
दशौ द्वार नरकै में बूड़े तू गंधीको बेढो ॥ १ ॥
फूटे नैन हृदय नहिं सूझै मति एकौ नहिं जानी ।
काम क्रोध तृष्णाके मारे बूड़ि मुये बिन पानी ॥ २ ॥
जारे देह भसम हैजाई गाड़े माटी खाई ।
शूकर श्वान कागके भोजन तनकी यहै बड़ाई॥३॥
चेति न देखु मुगुध नर वौरे तूते काल न दूरी ।
कोटिन यतन करै बहु तेरे तनकी अवस्था धूरी॥४॥
वालूके घरवामें बैठे चेतत नाहिं अयाना ।
कह कबीर यक राम भजे बिन बूड़े बहुत सयाना ॥ ५ ॥
चलहुका टेढ़ोटेढ़ोटेढ़ो।दशौ द्वार नरकैमें बूड़ैतू गंधीकोबेढ़ो
तीन बार टेढ़ो टेढ़ो टेढ़ो जो कह्यो सो ज्ञानकांड कर्मकांड उपासना कांड
ये तीनों मार्ग अथवा सतोगुणी रजोगुणी तमोगुणी ये तीनों कर्मते टेढ़े हैं सो
ये मार्ग में कहा चलोहौ दशौ द्वार जे दशौ इन्द्री हैं ते नरकही में लगी हैं
कहे बिषयन ही में लगी हैं सो तेरे बिषयकी गन्धि लगी है ताते तैं गन्धी है
सो तोहीं ऐसे गन्धी को माया बेढ़िलियो कहे तेरो ज्ञान छोड़ाइ लियो । अरु
जो बेड़ो पाठ होइ तौ यह अर्थहै कि तोहीं ऐसे गंधीको जाके दशौद्वार नरक
हीमें बूड़ेहैं ताको बेड़ो नहीं है जाते संसार सागर उतरि जाइ अथवा गन्ध
जगत जो है गन्धी शरीर ताको तैं बेड़ो कहे आधार कहा ह्वैरहैहै टेढ़ो टेढ़ो
चाल चलिकै यहां कहां तेरो पारकियो होइगो संसार सागरते न होइगो
बूड़िही जाइगो ॥ १ ॥
फूटे नैन हृदय नहिं सूझै मति एकौ नहिं जानी ।
काम क्रोध तृष्णाके मारे बूड़ि मुये बिन पानी ॥ २ ॥