कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 389, कुल 766 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्द । ( ३४१ )
बाबा ब्याह करायदे अच्छा वर हित काह ।
अच्छा वर जो ना मिलै तुम्हीं मोहिं विवाह ॥ २ ॥
यह स्थूल शरीर चरखाहै सो जरिजायहै कहे छूटि जायहै औ बढ़ैया जो
मनहै सो नहीं मरै है वह चरखा शरीर गढ़ि लेइ है कहे बनाइ लेइहै सो जीव
कहैहैं कि, मैं हजार सूत कातौहौं कहे कर्म छूटनेके लिये बहुत उपाय करौहौं
बहुत उपासना बहुत ज्ञान इन्हीं शरीरनते करौहौं परन्तु चरखला जे चारो
शरीर हैं ते नहीं जरै हैं ॥ १ ॥ जीव गुरुवन के इहां जाइकै कहैहै कि हे बाबा
गुरूजी! अच्छा वर हित करनवारो हो तै तासों व्याह कराय देउ अर्थात हित करन
वारो जो अच्छी देवनाकी उपासना कराइदेइ अरु आछो देवता जो तुम्हें न मिलै
कहे मुक्ति करि देनवारो देवना जो तुम्हें न मिलै तौ तुम्हीं मोको बिवाहौ कहे-
ज्ञान उपदेश करिकै अपनो मेरो जो भेद है ताको मेटवाइदेउ ॥ २ ॥
प्रथमै नगर पहुंचतै परिगो शोक सँताप ।
एक अचंभौ हौं देखा बेटी ब्याहै बाप ॥ ३ ॥
प्रथम साधन बतायो गुरुवालोग कि, ईश्वरकी उपासना करौ जामें अभेद
ज्ञान होय सो प्रथम नगर पहुंचतै कहे जब गुरुवा देवताकी उपासना बताइ-
दियो ताही प्रथमही शोक संताप परिगयो कहे तौने देवताको बिरह भयो
सो जरन लग्यो अरु दूसरो ज्ञान उपदेश जो मांग्यो तामें बड़ो आश्चर्य भयो
कि, बेटी बापको बिवाह्यो । जब उन उपदेश कियो कि तुम्हीं ब्रह्महौ तुम्हीं
सर्वत्र पूर्ण हौ सो जीवतौ कबहूं ब्रह्म होतई नहीं है सो ब्रह्मतों न भयो औ न वामे
ब्रह्मके लक्षण आय भयो कहा कि आपने को ब्रह्म मानि कर्म धर्म सब छोड़ि-
दियो सो ज्ञान अज्ञान जीवही को होइ है सो माया जीवहीते भई है सोई
बेटी है सो बाप जीवको बिवाहि लियो कहे बांधि लियो ॥ ३ ॥
समधी के घर लमधीआयो आयो बहू को भाइ ।
गोड़ चुलहौनै दै रहे चरखा दियो डढाइ ॥ ४ ॥