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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 384

न्द्रको अरपि दीन्ह्यो जाइ ज्योति भेदिकै साहबमें समाइगयो तामें प्रमाण ॥
"तज्ज्योतिर्भेदेनसक्ता रसिका हरिवेदिनः॥" इति॥औ श्रीकबीरहूजीको प्रमाण॥
'जैसे माया मन रमै तैसे राम रमाय । तारामंडल भेदिकै तबै अमरपुर जाय'॥३॥
इति चौंसठवां शब्द समाप्त ।
अथ पैंसठवां शब्द ॥ ६५ ॥
योगिया फिरिगयोनगरमँझारी।जायसमान पांचजहँनारी १
गये देशांतर कोइ न बतावै।योगिया गुफा बहुरि नहीं आवै२
जरि गो कंथ ध्वजागो टूटी।भजिगो दंड खपरगो फूटी॥३॥
कह कबीर यह कलिहै खोटी।जोरह करवा निकलल टोंटी४
योगियाफिरिगयो नगरमँझारी।जाय समानपांचजहँनारी १
जौने ब्रह्मांडमें पांचनारी जे बयारि हैं नाग कूर्म कृकल देवदत्त धनंजय
ई जिनमें समाइहैं ऐसे प्राण अपान व्यान उदान समानते जामें समाइगयेहैं
तौन जोहै नगर ब्रह्मांड ताके मांझते योगिया जो है योगी सो फिरिजाइहै
कहे फिरिफिरि ब्रह्मांडको प्राण चढ़ाइ लैजाइहै ॥ १ ॥
गये देशांतर कोइ नबतावै।योगिया बहुरि गुफानाहिं आवै २
जरिगो कंथ ध्वजागो टूटी।भजिगां दंड खपरगो फूटी॥३॥
जब वह योगी शरीर छोड़्यो तब कोई नहीं बतावै है कि कौन देशांतर
को गयो कौने लोकको गयो काहेते कि कौन्यो लोक को तौ मानतै नहीं है
तेहिते यही शरीर पुनि पावैहै तब वह योगकी सुधि बिसरि जाइहै पुनि
नहीं गुफामें आवैहै कहे पुनि नहीं प्राण चढ़ावत बनै है॥२॥कंथजोहै शरीररूपी
गुदरी सो जरिगयो तब ध्वजा जो है पवन तौनेकी धारा टूटिगई तब मेरुदंड
भंजित द्वैगयो कहे टूटिगयो औ खप्परजो है ब्रह्मांडकी खंपरी सो फूटिगई ॥ ३॥
कह कबीर यह कलिहै खोटी।जोरह करवा निकसलटोंटी४
श्रीकबीरजी कहै हैं कि यह कलि बड़ो खोटोहै अथवा यह कलि जो है
झगड़ा सो बड़ो खोटहै यह कोई नहीं बिचारै है कि जब शरीरही नहीं गयो