कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशब्द । ( ३२७ )
जारों मांग मैं तासु नारिकी सरिवर रचल हमारी ॥ २ ॥
जना पांच कोखियामें राखौं औ राखौं दुइ चारी ।
पार परोसिनि करों कलेवा संगहि बुधि महतारी ॥ ३ ॥
सहजै बपुरी सेज बिछायो सूतल पाउँ पसारी ।
आउँ न जाउँ मरों ना जीवों साहब मेट्यो गारी ॥ ४ ॥
एक नाम मैं निजके गहिल्यो तौ छूटल संसारी ।
एक नाम मैं बदिकै लेखौ कहै कबीर पुकारी ॥ ५ ॥
माई मैं दूनौ कुल उजियारी ।
बारह खसम नैहरे खायो सोरह खायो ससुरारी ॥ १ ॥
चित् शक्ति कहै है कि, हे माई! कहे हे माया! मैं दूनों कुल उजियार कर-
नहारी हौं कहे मोहींते जीव कुल उजियार हैं।जीवछः प्रकारके है १ मुक्त
२ मुमुक्षु ३विषयी ४बद्ध ५नित्यबद्ध ६नित्यमुक्त।औ ब्रह्म कुल उजियारहै सब ईश्वर
ब्रह्म कुलहीमें हैं याते ब्रह्मकुल कह्यो । मैंहीं अनुभव करौहौं तब ब्रह्म होइहै औ
मैंहीं सब जीवकी चैतन्यता हौं सो बारह खसमको नैहरमें खायो । ते बारह
खसम कौनहैं तिनको कहै हैं-अष्टप्रधान जे हैं काली, कौशिकी, विष्णु, शिव,
ब्रह्मा, सूर्य, गणेश, भैरव, औ नवौं परमपुरुष जिनके ई आठौ प्रधान कहे
मंत्री हैं । इनको महातंत्रमें वर्णन है । औ पांच ब्रह्म आदि मंगलमें
वर्णन करिआये हैं तिन में रफरूप जो है सो मंत्ररूप है औ परा शक्ति है
ताको शक्तिमान में अंर्तभाव है । औ शब्दब्रह्म प्रणवरूप है सो उपास्य देवता
नहीं है, विचार करिबेलायकैहै। तेहिते पांचब्रह्ममें तीनि ब्रह्म उपासना करिवे
लायक हैं सो अष्टप्रधान औ नवौं परमपुरुष औ तीनिब्रह्म मिलाइकै बारह
उपास्य भये तेई खसम भये तिनको शुद्ध समष्टि जो है सोई नैहर है जहांतें
व्यष्टि होइहै । सो जहां समष्टि व्यष्टि भयो है तहां मैं इनको खाइलियो है कहें
पेटमें डारिलियो है मोहिते भिन्ननहीं है औ जब मैं अहंब्रह्म बुद्धि करिकै ब्रह्ममें