सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 376

( ३२६ ) बीजक कबीरदास ।
लैकैं बाहरै धरोगे ॥ १ ॥ सो या काया जो है: ताकों बिगुरचन कहै छूटैमें
आनि आनि बाटि है काहेते कोई तो या कायाको जारैहै, औ कोई माटीमें
गाड़ैहैं, सो जो गाड़ैहै औ जारै है तिनको अब कहै हैं ॥ २ ॥
हिंदू लै जारै तुरुक लै गाड़ै । ई परपंच दुनौ घर छाड़ै ॥ ३ ॥
कर्म फांस यम जाल पसारा। ज्यों धीमर मछरी गहि मारा ॥४॥
राम बिना नर हैहौ कैसा । वाट मांझ गोबरौरा जैसा ॥ ५ ॥
सो हिंदू जेहैं ते तो जारैहैं औ तुरक नैहैं ते गाड़ैहैं । सो ई दूनौ घरमें जो
परपञ्च है ताको तू छाड़ै ॥ ३ ॥ संसारमें यमराज कर्म फांस रूपी जाल पसा-
रिराख्योहै । जाही शरीरमें जीव जायहै तहँ मारि डारैहैं जैसे धीमर जौने डाव-
रमें मछरी जायहै तौनेही डावरते खैंचिकै मारिडारै है । तब शरीरकी नाना
वाटि होइहै भस्म होयहै कीरा होयहै विष्ठा होय जायहै ॥ ४ ॥ सो हे
जीवो ! बिना साहबके जाने तुम कैसे होउगे बाटमें, जैसे गोबरौरा जोई आवै
जाय सोई कचरि देइहै मरिजायहै ॥ ५ ॥
कह कबीर पाछे पछितैहौ । या घरसों जब वा घर जैहौ ॥६॥
सो कबीरजी कहै हैं कि, जब या घरसों वा घर जाउगे अर्थात् जब यह
शरीर ते दूसरो शरीर धरौगे, गर्भवास होइगो तब पछिताउगे । गर्भवासमें
साहब की सुधि होइहै सो जब गर्भवासको क्लेश होइगो तब कहौगे कि, हें
साहब अबकी बार जो छुड़ावो तौ फिर न ऐसे काम करेंगे । सो गर्भ स्तुति
श्रीमद्भागवतादिकनमें प्रसिद्ध है । तेहिते यह व्यंग है कि, परम पुरुष पर
श्रीरामचन्द्रको जानो ॥ ६ ॥
इति इकसठवां शब्द समाप्त ।
अथ बासठवां शब्द ॥ ६२ ॥
माई मैं दूनों कुल उजियारी ।
बारह खसम नैहरे खायो सोरह खायो ससुरारी ॥ १ ॥
सासु ननाँदि मिलि पटिया वांधल भसुरा परलो गारी ।