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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 364

( ३१४ ) बीजक कबीरदास ।
श्रीकबीरजी साहब की उक्तिमें कहैहैं गुरुमुख ।
अथ छप्पनवां शब्द ॥ ५६ ॥
॰ नरको नहिं प्रतीति हमारी ।
झूठे बनिज कियो झूठे सन पूजी सबै मिलि हारी ॥ १ ॥
षट दर्शन मिलि पंथ चलायो तिर देवा अधिकारी ।
राजा देश बड़ो परपंची रइअत रहत उजारी ॥ २ ॥
इतते उत औ उतते इत रहु यमकी सांट सँवारी ।
ज्यों कपि डोर बांधि वाजीगर अपने खुशी परारी ॥ ३ ॥
यहै पेठ उत्पत्ति प्रलय को विषया सबै विकारी ।
जैसे श्वान अपावन राजी त्यों लागी संसारी ॥ ४ ॥
कह कबीर यह अद्भुत ज्ञाना मानो वचन हमारो ।
अजहूं लेहुं छोड़ाय कालसों जो घट सुरति सँभारो ॥५॥
नरको नहिं प्रतीति हमारी ।
झूठे बनिज कियो झूठे सन पूजी सबै मिलि हारी ॥१॥
सबते गुरु परम परपुरुष पर श्रीरामचन्द्र कहै हैं कि, नरको हमारी पर
तीति नहीं है सब लोग झूठेसों झूठी बनिज करत भये । कहे झूठे ब्रह्ममें जे
लगावैं हैं ऐसे जे गुरुवा लोगहैं सौदागर तिनसा झूठी बनिज करतभये कहे झूठे
ब्रह्मम लगावैं हैं अर्थात् जो वे उपदेश कियो कि, "तुमहीं ब्रह्महौ" सो झूठा है
तासों बनिज करिकै पूजी सब हारिगयो कहे अपनी आत्माको ज्ञान भूलि गयो ।
कौन ज्ञान भूलिगये कि, यह आत्मा तो मेरो सदाको दास है बद्धहूमें मुक्तहूमें
है ताम प्रमाण॥ "दासभूताः स्वतः सर्वे ह्यात्मानः परमात्मनः । नान्यथा लक्ष-
णन्तेषां बंधे मोक्षे तथैव च" ॥ इति पद्मपुराणे ॥ १ ॥ जो कहौ भुलवाइ कौन
दियो ? सो आगे इसका समाधान करते हैं ।