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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 363

शब्द । ( ३१३ )
अब ब्याहको रूपक कहैं हैं । गुरुवा लोग जे हैं तेई पुरोहित हैं उपदेश करन
वारे ते छेरी जो है माया ताको औ बाघ जो है जीव ताको ब्याह होतहै अर्थात्
जीवको मायामें डारिदेइ हैं । औ छेरी जो है माया ताको वाघ जो है जीव
सो खाइलेनवारो है अर्थात् जो जीव आपने स्वरूपको जानै तौ मायाको नाश
करिदेई । अरु तहांगायरूपी जो गायत्री है सो मंगल गावै है अर्थात् सब
जीवको कर्त्तव्य गायत्री गावै है वेद गायत्री ते कह्यो है औ वन कहे वाणीकों
रोझ जो है प्रणव ताको दाइज दीन्हो । यहां रोझको प्रणव काहेते कह्यो
कि, रोझ गवै कहावै हैं काहेते कि, गोकी सदृश होइ है । सो गैया
जो है गायत्री ताके सदृश प्रणवही है अर्थात् वह गायत्री प्रणवही ते निकसी
है । प्रणव ब्रह्म है ताको दाइज दीन्हो कहे ब्रह्म मैंहीं हौं । यही प्रणवको
अर्थ समुझाइ दीन्हो । कन्याकेसाथ जो डोलहाइ जाइ हैं तेलोकंदी
[L13