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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 360, कुल 766 में से

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पृष्ठ 360

( ३१० ) बीजक कबीरदास ।
कि, जब विवाहद्वै जाइहै तब स्त्री अर्द्धांगी ह्वैजाइहै औ सुवासिनि वे कहावैहैं जे या
कुलकी कन्या अनत बिवाही रहैहैं सो जब संसारमें जीव ब्रह्म फांसमें फँसिगयो
तब सुवासिनि जे हैं साहबके जनैया तिनको ब्रह्मसों विवाह नहीं भयो ते अरघ
दैके कहे उपदेश करिकै वाको लैचले सो यद्यपि याको चौका बनोहीहै मड़ये
के तर बैठीही है अर्थात् यद्यपि संसारमें शरीर धारण किये है परंतु तहँ राँढ़
ह्वैगई ब्रह्मको पतिमानि राख्योहै । सो बिचारा मरिगयो अर्थात् वाको धोखा-
समुझि लियो यहां रांड़ हैबो कहिआये औ सांच सांईको संग बनैहै यह जों
कह्यो सो साहब सर्वत्र बनैहै वह अहंब्रह्मको बिचार मिटिगयो ॥ ३ ॥
भयो बिवाह चलीबिनु दूलह वाट जात समधी समुझाई ३
कह कबीर हम गौने जैबे तरब कंतलै तूर बजाई ॥ ४ ॥
सोइ सत रहते विवाह भयो कहे इस तरहते संसारी भयो । औ पुनि बिन
दूलह चलतभई कहे अहंब्रह्म बुद्धि न रहिगई मुक्ति हैकै चित्शक्ति जीव साह-
बके पास जाइबेकी गैल लियो सो वह बाट जातमें समधी जो है शुद्ध समष्टि
जवि सो याको समुझावत भयो कि, जैसे हम शुद्ध हैं तैसे तुमहूं शुद्ध हौ ।
अर्थात् जब जीव साहबके लोक प्रकाशको बेधिकै साहबके लोकको चल्यो तब
यह समुझत भयो किं, जैसे ये शुद्ध रहे हैं तैसे हमहूं शुद्ध रहेहैं, यह बीचहीमें
धोखा भयो है। उनको देखिकै यह ज्ञान भयो यही उनको समुझाइबो है । सो कबीर
जो है कायाको बीर जीव सो कहैहै कि, मन बचनके परे जो साहब के ऊपर
दूसरो साहब नहीं है जासों हमारो विवाह ह्वैबेको नहीं है । वह हमारो सदा
कौं कंत है । तहां हम गवनजाइहै अर्थात् तहांको हम गवन करेंगे । अरु वाही
कंतको लैके कहे पाइकै तरिजाब । औरे कंतको लैके न तरेंगे । औ तहँ परम
मुक्ति रूपी तूर बजावेंगे । अर्थात् और ईश्वरनमें लागे औ आपनेको ब्रह्म माने
मुक्तिरूपी तूर न बाजैगो अर्थात् संसार औ सब उपासना औ ब्रह्म ह्वैजाइबो
ये सब तुरिकै साहबके पास जाइकै अर्थात् डंकादैके जाइगो ॥ ४ ॥
इति चौवनवां शब्द समाप्त ।