कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजो तैं साहब होइ तब तेरा होइ। रामखोदाय औ शक्ति शिव जैहैं तिनमें कहुयौं तैं
काको निबेरा कियो है कि, एक यह जगतको मालिक है। औ वही मैं हौं। अर्थात्
इनकी सामर्थ्य तोमें एकऊ नहीं देखिपरेहै ताते इनमें तैं कोई नहीं है ॥ ३ ॥
वेद पुराण कुरान कितेवा नाना भांति बखानी ।
हिंदू तुरक जैनी औ योगी एकल काहु न जानी ॥४॥
वही साहबको नाना नाम लैके कहैहैं सो वेद पुरान कुरान किताबमें वही
साहबको सबने परे नाना भांतिते नाना नामलैके बर्णन कियो है यही हेतुते
हिन्दू तुरक जैनी योगी एकल कहे एक नामकरिकै कोई नहीं जान्यो कि,
एक यही सिद्धांतहै यही सबको मालिकहै । अथवा एकल कहे जौने करते जोने
उपायते मैं मन वचनके परे साहबको जान्यो है सो कोई नहीं जान्यो ॥ ४ ॥
छः दरशनमें जे परवाना तासु नाम मन माना ।
कह कबीर हमहीं हैं बौरे ई सब खलक सयाना ॥ ५ ॥
छहउ दर्शनमें अरु जेते सब हिन्दू तुरुक आदि वर्णन करि आये तिन सबमें
जौन धोखा ब्रह्म को प्रमाण परैहै तौनेही को नाम सबके मनमें मानै है। कह-
ते तौ मन वचनके परे हैं परंतु कोई ब्रह्म कहिकै कोई अल्लाह कहिकै कोई
जीवात्मा कहिकै वाहीको सब मानै हैं। सो कबीरजी कहैहैं कि, सब खलक
सयाना है काहेते कि, कहते तो यह बात हैं कि, वहतो मन वचनमें आवते
नहीं है औ जे मन वचनमें आवै हैं तिन्हीं में फिरि लागे है ताते हमहीं बौरहाहैं
जो ऐसो कहैहैं कि, साहब आपही ते कृपा करिकै अनिर्वचनीय रामनाम स्फुरि-
त करि देइहैं ताहीके मिलनको उपाय बतावै हैं यह काकु करै हैं ॥ ५ ॥
इति अड़तालीसवां शब्द समाप्त ।
अथ उनचासवां शब्द ॥ ४९ ॥
बुझ बुझ पण्डित पद निर्वांना । सांझ परे कहँवां बस भाना १
नीच ऊँच पर्वत ठेला न भीत । बिन गायन तहँवा उठ गीत २