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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

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पृष्ठ 343

शब्द । ( २९३ )
मूँड़े कहे जिनके शिखा नहीं है मुसलमान लोग तिनको एकऊ नहीं छोड़्यो ।
अबहूं भर वह आदिकहे आद्या जो मायाहै सो कुँवारीही बनी है अर्थात् हिंदू
मुसलमानको आपही बशकै लियो है इनके बश नहीं भई ॥ ३ ॥
मायिक न रहे जाइ न ससुरे सांई संग न सोवै ।
कह कबीर वे युगयुग जीवैं जाति पांति कुल खोवैं॥४
अरु मायिक जो है शुद्ध आत्मा जाके उत्पत्ति भईहै माया तहां तो रहतही
नहीं है वहां तौ जीवके साहबको अज्ञान रूप कारण मात्र रह्योहै । औ सासुर
जो है लोक प्रकाश ब्रह्म जहां जीव मान्यो है कि, ब्रह्म मैंही हों, सो धोखाहै ।
तहां नहीं जाइहै औ वही सांई कहे पतिहै काहेते कि, वही मायासबलित होइ
है तब जगत् होइ है ताके संग नहीं सोवैहै काहेते कि, वहतो धोखई है औ
वह माया धोखा है जो कछु वस्तु होइ तब न वाके संग सोवै । श्रीकबीरजी
कहैं कि, सब जगतको माया लपेटि लियो है । जे जीव साहब औ साहबकी
जाति आपको मानै हैं औ अपनी जाति पांति कुल खोवैं हैं सोई मायाते बचे हैं
औ युग युग जियै हैं और तो सबको माया खाइही लियो है अर्थात् उनहीं को
जनन मरण नहीं होयहै ॥ ४ ॥
इति चवालीसवां शब्द समाप्त ।
अथ पैंतालीसवां शब्द ॥ ४५ ॥
कौन मुवा कहु पंडित जना।सो समुझाय कहौ मोहिंसना १॥
मूये ब्रह्मा विष्णु महेशा । पावती सुत मुये गणेशा ॥ २ ॥
मूये चन्द्र मुये रवि केता।मुये हनुमत जिन्ह बांधी सेता३॥
मूये कृष्ण मुये करतारा। यक न मुवा जो सिरजन हारा॥४॥
कहै कबीर मुवा नहिं सोई । जाको आवा गमन न होई॥५॥