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सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

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पृष्ठ 337

शब्द । (२८७)
जे परमपुरुष पर जे श्रीरामचन्द्र तिनते विमुख हैं ते सब लोकनमाँ निन्दित
हैं तामें प्रमाण-“ यश्चरामनपश्यत्तुयंचरामो नपश्यति । निन्दितस्सर्वलोकेषु
स्वात्माप्येनंविगर्हते ” ॥ ५ ॥
इति चालीसवां शब्द समात ।
अथ इकतालीसवां शब्द ॥ ४१ ॥
पण्डित देखौ मनमो जानी ।
कहुधौं छूति कहांते उपजी तवाहिं छूति तुम मानी ॥ १ ॥
नादै विन्दु रुधिर यक संगै घटहीमें घट सज्जै ।
अष्ट कमलकी पुहुमी आई यह छूति कहां उपज्जै ॥ २ ॥
लखचौरासी बहुत वासना सो सब सरिभो माटी ।
एकै पाट सकल बैठारे सींचि लेत धौं काटी ॥ ३ ॥
छूतिहि जेंवन छूतिहि अचवन छूतिहि जग उपजाया ।
कह कबीर ते छूति विवर्जित जाके संग न माया ॥ ४ ॥
पंडित देखौ मनमो जानी ।
कहुधौं छू