सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)

Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary

सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished766 पृष्ठ

पृष्ठ 331, कुल 766 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 331

शब्द । ( २८१ )
अथ सतीसवाँ शब्द ॥ ३७ ॥
हरिठगठगत सकलजगडोला।गवनकरतमोसोंमुखहुनबोला
बालापनके मीत हमारे । हमें छोड़ि कहँ चले सकारे॥२॥
तुम अस पुरुष हौं नारि तुम्हारी।तुम्हारि चाल पाहनहुँते भारी
माटिक देह पवनको शरीरा।हरि ठग ठगतसोडर ल कबीरा४
हरिठगठगतसकलजगडोला।गवनकरतमोसोंमुखहुनबोला १
जीव कहे हैं कि, हरिको ठग जो गुरुवाहै सो ठगहारी करिकै सब जीवन
को ठगतकहैं हरिते विमुख करत जगडोलाकहे संसारमें फिरै है । अरु जब
गमनकरनलगे यम घेरिलियो तब मोसों मुखहूते न बोले कि, एतेदिन जौने
जौनमें लगेरहे ब्रह्ममें अथवा जीवात्मामें ते न बचायो । यह खबरिकहि समु-
झाय न दियो कि, हम को धोखा हैगयो तुमहूं धोखामें न परौ ॥ १ ॥
बालापनके मीत हमारे । हमें छोड़ि कहँ चले सकारे ॥२॥
तुमअसपुरुष हौं नारितुम्हारी।तुम्हारी चालपाहनहुँतेभारी
सो तुम बालापनके हमारे मीतहौ जबभर रह्यो जियो तबभर हमको धोखाही-
में लगायेरहे अब हमें छोड़िकै सकारे कहे हमहींते आगे कहांजाहुगे काहेते
कि, तुमतो काहू को रक्षक मान्यो नहीं वही धोखामें लगेरहे, आपही को
मालिक मानेरहे, अब तुम्हारी रक्षा कौन करै ? सो जब तुम्हारी कोई न कियो
यम लैहीगये तौ जौन ज्ञान हमको दियो है तौनेते हमारी रक्षाकौन करैगो॥२॥
तुम ऐसो हमारे पुरुषहै तुम्हारी हम नारी हैं काहेते कि, बीजमंत्र हम को
उपदेश दियो है सो तुम्हारी चाल पाहनौते भारी है कहे पाहनौ ते जड़ है तेहिते
साहबको भुलाइदियो ॥ ३ ॥
माटिकि देह पवनकोशरीरा।हरिठग ठगतसोडरलकबीरा४
माटीकी यह देह है सो स्थूल शरीर नाशवानहै औ पवनको शरीर सूक्ष्म
शरीर है सो मनोमय चंचलहै ज्ञानभये वहौ नाशमानहै तामें स्थित जे कबीर कहे